सावधान! 40 पार करते ही बढ़ता है गंभीर हार्ट अटैक का जोखिम; जानें कैसे फोर्टिस अस्पताल जालंधर बना संजीवनी

इमरजेंसी कार्डियक केयर में फोर्टिस ने हासिल की बड़ी उपलब्धि; ‘गोल्डन आवर’ में प्राइमरी एंजियोप्लास्टी और थ्रोम्बोलिसिस से बचाई गई जानें

जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) :  फोर्टिस हॉस्पिटल जालंधर ने मंगलवार को गंभीर हार्ट अटैक, जिसे एसटी-एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (स्टेमी STEMI) कहा जाता है, के दौरान तेज़ी से इलाज की अहमियत पर ज़ोर दिया। अपने मज़बूत इमरजेंसी रिस्पॉन्स को दर्शाते हुए, फोर्टिस हॉस्पिटल जालंधर ने बताया कि नवंबर 2025 से अब तक 111 स्टेमी मामलों का सफल इलाज किया गया है, जिनमें 91 प्राइमरी एंजियोप्लास्टी (दिल की बंद धमनियों को खोलने के इमरजेंसी प्रोसीजर्स) और 19 थ्रोम्बोलिसिस (क्लॉट-घुलने वाली) प्रोसीजर्स शामिल हैं। दिल को होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए रक्त के प्रवाह को तेज़ी से बहाल करना बहुत ज़रूरी है। डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व डॉ.वी.पी.शर्मा, सीनियर डायरेक्टर और एचओडी, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल जालंधर कर रहे हैं।

स्टेमी (STEMI) क्या है और 40+ के लोग क्यों रहें सतर्क?

स्टेमी हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी (कोरोनरी आर्टरी) में पूरी तरह से थक्का (ब्लड क्लॉट) जम जाता है और ब्लड सप्लाई बंद हो जाती है

मुख्य कारण और जोखिम:

  • 40 की उम्र के बाद हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना।

  • धूम्रपान और तंबाकू का सेवन।

  • तनावपूर्ण और भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल।

  • परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास।

इमरजेंसी में ‘गोल्डन आवर’ है सबसे अहम

फोर्टिस हॉस्पिटल जालंधर के कार्डियोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर व एचओडी डॉ. वी.पी. शर्मा के अनुसार, गंभीर हार्ट अटैक में शुरुआती समय (गोल्डन आवर) बेहद कीमती होता है। मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाकर धमनियों को खोलना बेहद जरूरी है।

अस्पताल में नवंबर 2025 से अब तक 111 मरीजों का सफल इलाज किया गया है:

  • 91 इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी (Primary Angioplasty): इसके जरिए बंद धमनियों को बिना देरी किए तुरंत खोला गया।

  • 19 थ्रोम्बोलिसिस (Thrombolysis): क्लॉट-घुलने वाली दवाओं की मदद से ब्लॉकेज हटाया गया।

मरीज और आम जनता के काम की बातें: लक्षण दिखते ही क्या करें?

1. इन लक्षणों को हल्के में न लें:

  • छाती में तेज दर्द, भारीपन या दबाव महसूस होना।

  • दर्द का बाएं हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैलना।

  • अचानक तेज पसीना आना, घबराहट और सांस फूलना।

2. तुरंत इलाज का विकल्प चुनें:

  • प्राथमिकता (Primary Angioplasty): इमरजेंसी में कैथ लैब ले जाकर बंद धमनी में स्टेंट डालना सबसे असरदार तरीका है।

  • थ्रोम्बोलिसिस (Thrombolysis): अगर मरीज ऐसे स्थान पर है जहां एंजियोप्लास्टी की सुविधा तुरंत उपलब्ध नहीं है, तो क्लॉट घोलने वाली दवा दी जाती है।

बचाव के 4 सबसे आसान उपाय

  1. 40 की उम्र के बाद नियमित जांच: साल में कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूर कराएं।

  2. तंबाकू और स्मोकिंग से दूरी: यह नसों में थक्का जमने का सबसे बड़ा कारण है।

  3. सक्रिय दिनचर्या: रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या हल्का व्यायाम करें।

  4. इमरजेंसी का नंबर रखें पास: अपने नजदीकी एडवांस कार्डियक केयर (कैथ लैब) वाले अस्पताल का इमरजेंसी नंबर हमेशा अपने फोन में सेव रखें।

विशेषज्ञ की सलाह: फोर्टिस हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. अंकुश मेहता और सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वी.पी. शर्मा का कहना है कि सही समय पर सही फैसले और जागरूकता से किसी भी गंभीर हार्ट अटैक के मरीज की जान बचाई जा सकती है। अपने दिल की सेहत पर ध्यान दें और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें।

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