सेहत को लेकर बरतें सावधानी

जालंधर (जागरूक पंजाब ब्यूरो): जालंधर और आसपास के इलाकों में सोमवार सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही और भारी उमस के कारण लोग परेशान रहे। हालांकि, दोपहर करीब 11:30 बजे हुई अचानक बूंदाबांदी ने भीषण गर्मी से मामूली राहत जरूर दी है, लेकिन हवा में नमी (Relative Humidity) का स्तर 90% तक पहुंच जाने के कारण उमस भरी गर्मी का माहौल लगातार बरकरार है।
IMD का दो दिनों का पूर्वानुमान: 21 और 22 जुलाई को झमाझम बारिश के आसार
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के चंडीगढ़ केंद्र द्वारा जारी आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, जालंधर में मानसून अगले दो दिनों में और अधिक सक्रिय होने जा रहा है:
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21 जुलाई (मंगलवार): आसमान में पूरी तरह से बादल छाए रहेंगे (Generally cloudy sky)। शहर और बाहरी इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश के कुछ अच्छे स्पेल (spells of rain) देखने को मिल सकते हैं। इस दौरान अधिकतम तापमान 32.0°C और न्यूनतम तापमान 27.0°C रहने का अनुमान है।
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22 जुलाई (बुधवार): बारिश की रफ्तार में और तेजी आने की संभावना है। बुधवार को अधिकतम तापमान गिरकर 30.0°C पर आ सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 26.0°C के आसपास दर्ज किया जाएगा। तापमान में इस गिरावट से उमस से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
🩺 सेहत पर भारी न पड़ जाए बरसात: सिविल अस्पताल के RMO डॉ. हरमीत सिंह की विशेष सलाह
मौसम में अचानक हो रहे इस उतार-चढ़ाव और उमस के कारण अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के मरीजों की तादाद बढ़ने लगी है। जालंधर सिविल अस्पताल के आरएमओ (Resident Medical Officer) डॉ. हरमीत सिंह ने ‘जागरूक पंजाब’ के माध्यम से विशेष चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि “इस मौसम में एक तरफ जहां उमस बैक्टीरिया और वायरस को पनपने का मौका देती है, वहीं ठहरा हुआ पानी मच्छरों का घर बन जाता है। सिविल अस्पताल में इस वक्त ओपीडी में सर्दी, खांसी, डायरिया और वायरल बुखार के मरीजों में इजाफा देखा जा रहा है। लापरवाही बिल्कुल न बरतें, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के खान-पान का पूरा ध्यान रखें। हल्का बुखार होने पर भी तुरंत सरकारी अस्पताल में जांच करवाएं, खुद से दवाइयां (SELF-MEDICATION) लेने से बचें।”
🚨 सावधान! पैर पसार रही हैं ये बीमारियां और ऐसे करें बचाव
1. डेंगू और चिकनगुनिया (मच्छर जनित रोग): सावन की बारिश के बाद छतों, गमलों, टायरों या कूलरों में साफ पानी जमा हो जाता है, जो एडीज (Aedes) मच्छर के पनपने के लिए अनुकूल है। यही मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया फैलाते हैं।
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बचाव: हर शुक्रवार को ‘ड्राई डे’ के रूप में मनाएं और घर के आसपास पानी जमा न होने दें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और सोते समय मच्छरदानी या मॉस्किटो रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
2. डायरिया, टाइफाइड और पीलिया (दूषित पानी व भोजन): बारिश के दिनों में पीने के पानी के स्रोत दूषित होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
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बचाव: हमेशा पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पीएं। बाहर का कटा हुआ फल, बासी खाना और स्ट्रीट फूड खाने से पूरी तरह परहेज करें।
💡 नॉलेज बॉक्स: उमस (Humidity) और बीमारी का कनेक्शन
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पसीने का न सूखना: जब हवा में नमी (Relative Humidity) 85% से 90% के बीच होती है, तो हमारे शरीर का पसीना प्राकृतिक रूप से नहीं सूख पाता। इससे शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं होता और घबराहट व डिहाइड्रेशन होने लगता है।
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फंगल इंफेक्शन: लगातार पसीना आने और कपड़ों में नमी रहने के कारण त्वचा पर फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा 3 गुना बढ़ जाता है।

