जालंधर : पवित्र सावन महीने की शुरुआत के साथ ही बरसात का मौसम भी अपने शबाब पर है। लेकिन इस सुहावने मौसम में वातावरण में नमी (Humid weather) अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे खाने-पीने की चीजों में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं। यही वजह है कि इन दिनों फूड पॉइजनिंग, डायरिया और हैजा के मामले अचानक बढ़ जाते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. बृज वल्लभ शर्मा के मुताबिक, बरसात में हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम (पाचन तंत्र) भी थोड़ा धीमा हो जाता है, जिससे शरीर संक्रमण से मजबूती से नहीं लड़ पाता।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज:
दूषित भोजन या पानी के सेवन के कुछ घंटों से लेकर दो दिन के भीतर लक्षण दिख सकते हैं:
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लगातार उल्टी होना और पेट में मरोड़ उठना।
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दस्त (डायरिया) होना और तेज बुखार आना।
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शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) के कारण चक्कर आना या मुंह सूखना।
क्या खाएं और किन चीजों से बिल्कुल तौबा करें?
सावन के मौसम में क्या खाएं:
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हमेशा ताजा, गर्म और अच्छी तरह पका हुआ घर का खाना।
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मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया और सूप जैसी हल्की व सुपाच्य डाइट।
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उबला या अच्छी तरह फिल्टर किया हुआ पानी।
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मौसमी फल और सब्जियां, लेकिन उन्हें इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह धो लें।
भूलकर भी क्या न खाएं:
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खुले में रखा बासी खाना या रेहड़ी-पटरी का स्ट्रीट फूड।
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बाजार में पहले से कटे हुए रखे फल, कच्चा सलाद और चटनियां।
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ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और खुले में बिकने वाले बर्फ के ड्रिंक्स।
फूड पॉइजनिंग होने पर तुरंत क्या करें?
अगर संक्रमण के लक्षण दिखें, तो सबसे पहले शरीर में पानी की कमी पूरी करने के लिए ओआरएस (ORS) का घोल, नारियल पानी या नींबू-पानी लें। खुद से कोई भी एंटीबायोटिक दवा न खाएं। यदि बार-बार उल्टी हो या दस्त के साथ ब्लीडिंग हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
नॉलेज बॉक्स: बैक्टीरिया के लिए अनुकूल है यह मौसम
‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (FSSAI) के अनुसार, बरसात के दिनों में ई.कोली (E. coli) और सल्मोनेला (Salmonella) जैसे खतरनाक बैक्टीरिया गंदे पानी और मक्खियों के जरिए बहुत तेजी से फैलते हैं। फ्रिज का तापमान हमेशा 4°C के आसपास रखकर और कच्चे-पके भोजन को अलग रखकर इस खतरे को टाला जा सकता है।

