जालंधर, 18 जुलाई : भारत में डायबिटीज (मधुमेह) से पीड़ित करोड़ों मरीजों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। देश में पहली बार एक ऐसा बेसल इंसुलिन इंजेक्शन लॉन्च हुआ है, जिसे हफ्ते में सिर्फ एक बार लेना पड़ेगा। इससे मरीजों को रोज-रोज इंजेक्शन लगाने के दर्द और झंझट से मुक्ति मिल जाएगी।
डेनमार्क की मशहूर फार्मा कंपनी Novo Nordisk द्वारा तैयार किया गया यह नया इंजेक्शन ‘Awiqli’ (इंसुलिन आइकोडेक) ब्रांड नाम से भारत में 10 जुलाई 2026 से उपलब्ध हो चुका है। इसकी कीमत करीब ₹261 प्रति डोज है। भारत से पहले इसे अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) में भी मंजूरी मिल चुकी है।
यह कैसे काम करता है और किसे है जरूरत?
वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. साकेत कांत के मुताबिक, इंसुलिन अग्नाशय (पैंक्रियाज) द्वारा बनाया जाने वाला हार्मोन है, जो खून में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखता है। यह नया इंजेक्शन मुख्य रूप से उन मरीजों के लिए है जिन्हें ‘बेसल इंसुलिन’ (दिन-रात शुगर कंट्रोल रखने वाले लंबे असर वाले इंसुलिन) की जरूरत होती है। टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को जहां जीवनभर इंसुलिन लेना पड़ता है, वहीं टाइप-2 के मरीजों को गंभीर स्थिति में इसकी जरूरत होती है।
बरतनी होंगी ये सावधानियां:
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खुद से न बदलें दवा: मरीज अपनी मर्जी से इस वीकली इंसुलिन पर स्विच न करें। सही डोज और समय केवल डॉक्टर ही तय करेंगे।
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साइड इफेक्ट्स का खतरा: इसका सबसे आम जोखिम शुगर लेवल का अचानक बहुत कम होना (हाइपोग्लाइसीमिया) या इंजेक्शन की जगह पर सूजन आना है।
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स्टोरेज: इसे फ्रीज में 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर स्टोर करना जरूरी है। इसे फ्रीजर में न रखें।
🏃♂️ जरूरत की खबर: 500 मीटर चलने में ही थक जाते हैं तो सुधारें ये आदतें
क्या आप भी महज 500 मीटर पैदल चलने या एक मंजिल सीढ़ियां चढ़ने पर हांफने लगते हैं? अगर ऐसा है, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें। डॉक्टरों के मुताबिक, कम स्टैमिना के पीछे शरीर में पोषक तत्वों (विटामिन D, B12 और आयरन) की कमी, खराब लाइफस्टाइल, डिहाइड्रेशन और तनाव जैसी गलत आदतें जिम्मेदार होती हैं।
स्टैमिना बढ़ाने के उपाय:
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डाइट में सुधार: भोजन में प्रोटीन, हरी सब्जियां और नट्स (जैसे बादाम, अखरोट) शामिल करें।
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हाइड्रेटेड रहें: दिनभर में पर्याप्त पानी पीकर शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखें।
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एक्टिव रूटीन: रोज कम से कम 20-30 मिनट वॉक या योग जरूर करें।
नॉलेज बॉक्स: बेसल बनाम बोलस इंसुलिन
डायबिटीज मैनेजमेंट में दो तरह के इंसुलिन अहम होते हैं। बेसल इंसुलिन दिन-रात और खाली पेट भी शुगर को नियंत्रित रखता है, जबकि बोलस इंसुलिन भोजन करने के तुरंत बाद अचानक बढ़ने वाली शुगर को कंट्रोल करने के लिए भोजन से पहले लिया जाता है।

