Video देखें… टारगेट किलिंग की साजिश में जालंधर से गिरफ्तार जग्गी जौहल को करीब 9 साल बाद 7 एनआईए केसों में बेल, KLF को फंडिंग के रहे आरोप

जालंधर में अगस्त 2016 में RSS के पंजाब उपाध्यक्ष जगदीश गगनेजा पर हमला और लुधियाना में जनवरी 2017 में श्री हिंदू तख्त के अध्यक्ष अमित शर्मा की हत्या भी जग्गी से जुड़े मामले


जागरूक पंजाब न्यूज नेटवर्क

नई दिल्ली : ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जौहल उर्फ ‘जग्गी’ को दिल्ली हाईकोर्ट से सात मामलों में जमानत मिलने के बाद वीरवार, 1 अक्टूबर 2026 को तिहाड़ जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया। जौहल नवंबर 2017 से हिरासत में था। उस पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पंजाब में 2016-17 के दौरान हुई कुछ लक्षित हत्याओं और हत्या के प्रयासों की कथित साजिश से जुड़े मामलों में UAPA, IPC और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। जौहल इन आरोपों से इनकार करता रहा है। उसकी रिहाई का आधार दोषमुक्ति नहीं, बल्कि दिल्ली हाईकोर्ट का 18 सितंबर 2026 का जमानत आदेश है।

कौन है जगतार सिंह जौहल?

जौहल ब्रिटेन के स्कॉटलैंड स्थित डम्बार्टन का रहने वाला ब्रिटिश नागरिक है। उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक वह 2017 में पंजाब आया था और 4 नवंबर 2017 को जालंधर के रामा मंडी इलाके से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ कई मामले सामने आए, जिनमें बाद में आठ मामले NIA की जांच के दायरे में आए। दिल्ली हाईकोर्ट के 18 सितंबर के फैसले में उसके खिलाफ सात NIA मामलों की जमानत याचिकाओं पर फैसला हुआ।

NIA की चार्जशीट में जौहल पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) से जुड़ा था और कथित साजिश में सक्रिय भूमिका निभाता था। अदालत के रिकॉर्ड में अभियोजन का आरोप दर्ज है कि जौहल ब्रिटेन से फ्रांस गया और करीब 3,000 पाउंड की रकम KLF से जुड़े हरमिंदर सिंह उर्फ मिंटू तक पहुंचाई गई। अभियोजन के मुताबिक इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर पंजाब में हिंसक गतिविधियों के लिए किया जाना था। ये अभियोजन के आरोप हैं और इनका अंतिम न्यायिक परीक्षण अभी बाकी है।

किन घटनाओं से जुड़े हैं मामले?

NIA के मामलों में पंजाब में हुई कथित लक्षित हत्याओं और हत्या के प्रयासों से जुड़े आरोप हैं। इनमें लुधियाना में जनवरी 2017 में श्री हिंदू तख्त के अध्यक्ष अमित शर्मा की हत्या तथा जालंधर में अगस्त 2016 में RSS के पंजाब उपाध्यक्ष जगदीश गगनेजा पर हुए हमले से जुड़ा मामला भी शामिल है। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में सात मामलों में हत्या, आपराधिक साजिश, UAPA और आर्म्स एक्ट की धाराओं का उल्लेख है।

जमानत क्यों मिली?

दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को जौहल की सात मामलों में जमानत मंजूर की। अदालत ने माना कि वह आठ साल से अधिक समय से हिरासत में है, जबकि इन मामलों में 40 गवाहों की गवाही हो चुकी थी और 123 अन्य गवाहों की गवाही अभी बाकी थी। अदालत ने कहा कि ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना नहीं दिख रही है। साथ ही कोर्ट ने 2025 के एक मामले में जौहल की हुई बरी को भी जमानत के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना, हालांकि स्पष्ट किया कि वह अन्य मामलों में अंतिम फैसला नहीं है।

जमानत पर अदालत ने कई शर्तें लगाईं। जौहल को 5 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानती देने हैं, पासपोर्ट जमा करना है, हर पखवाड़े जांच अधिकारी के सामने पेश होना है और गवाहों से संपर्क या सबूत से छेड़छाड़ नहीं करनी है। उसे लंबित मामले के गुण-दोष पर सार्वजनिक बयान देने से भी रोका गया है।

पहले एक मामले में हो चुका है बरी

मार्च 2025 में मोगा की अदालत ने जौहल और अन्य आरोपियों को एक मामले में बरी किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2026 के अपने आदेश में दर्ज किया कि उस फैसले को अभियोजन ने चुनौती नहीं दी और वह अंतिम हो चुका है। हाईकोर्ट ने कहा कि समान आरोपों के कारण उस फैसले का जमानत के सवाल पर “मजबूत persuasive value” है, लेकिन उसे दूसरे मामलों में अंतिम फैसला नहीं माना।

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को जमानत की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जौहल तिहाड़ जेल से बाहर आया। इसके साथ ही नवंबर 2017 से चली आ रही उसकी लंबी हिरासत समाप्त हुई, लेकिन उसके खिलाफ बाकी मामलों की न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी।

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