वाराणसी-दिल्ली फ्लाइट IX 1253 में कार्गो कंपार्टमेंट से मिला स्मोक अलर्ट, पायलट ने लखनऊ डायवर्ट किया; सभी 155 यात्री सुरक्षित
2025 में Air India Express में 78 ‘सिग्निफिकेंट टेक्निकल डिफेक्ट’ दर्ज, 2026 के पहले छह महीनों में ही 53 मामले सामने आए
लखनऊ (जागरूक पंजाब नेटवर्क) : एयर इंडिया एक्सप्रेस की वाराणसी से दिल्ली जा रही फ्लाइट IX 1253 को गुरुवार सुबह उड़ान भरने के कुछ देर बाद स्मोक अलर्ट मिलने पर लखनऊ डायवर्ट किया गया। विमान के पिछले कार्गो कंपार्टमेंट से धुएं का संकेत मिलने के बाद पायलट ने एहतियाती तौर पर लखनऊ में लैंडिंग कराने का फैसला किया। फ्लाइट ने चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर करीब 8:52 बजे सुरक्षित लैंडिंग की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विमान में 155 यात्री सवार थे और सभी सुरक्षित रहे।
लैंडिंग के बाद एयरपोर्ट की इमरजेंसी रिस्पांस टीम और तकनीकी कर्मचारियों ने विमान की जांच की। शुरुआती जांच में विमान के अंदर आग या धुआं दिखाई नहीं दिया। स्मोक अलर्ट किस वजह से सक्रिय हुआ, इसकी तकनीकी जांच की जा रही है। Air India Express ने यात्रियों को रिफ्रेशमेंट उपलब्ध कराया और उन्हें दिल्ली पहुंचाने के लिए वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब एयरलाइन के तकनीकी रिकॉर्ड से जुड़े सरकारी आंकड़े भी चर्चा में हैं। संसद में 3 अगस्त 2026 को दिए गए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के लिखित जवाब के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के दौरान देश में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कुल 352 “सिग्निफिकेंट टेक्निकल डिफेक्ट्स” दर्ज किए गए। इनमें Air India Express के 53 मामले थे। इसी अवधि में Akasa Air के 152, IndiGo के 47 और Air India के 46 मामले दर्ज किए गए।
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में Air India Express के 78 सिग्निफिकेंट टेक्निकल डिफेक्ट्स दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में ऐसे मामलों की संख्या 9 थी। यानी 2024 से 2025 के बीच Air India Express के दर्ज तकनीकी दोषों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
हालांकि, इन आंकड़ों को इमरजेंसी लैंडिंग या दुर्घटनाओं की संख्या नहीं माना जा सकता। संसद में दिए जवाब में “significant technical defects” की संख्या बताई गई है, लेकिन इन 53 या 78 मामलों में कितनी बार विमान को डायवर्ट करना पड़ा, कितनी उड़ानें रद्द हुईं या कितने मामलों में वास्तविक सुरक्षा घटना हुई—इसका अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है।
सरकार ने इसी संसदीय जवाब में यह भी बताया कि जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच DGCA ने एयरलाइनों को सुरक्षा उल्लंघनों के संबंध में 382 शो-कॉज नोटिस जारी किए और 2023 से 2025 के बीच निर्धारित एयरलाइनों के खिलाफ 51 प्रवर्तन कार्रवाई की गई।
इसलिए लखनऊ की घटना में फिलहाल इतना ही तथ्य सामने है कि स्मोक डिटेक्शन अलर्ट के बाद फ्लाइट को एहतियात के तौर पर डायवर्ट किया गया, विमान सुरक्षित उतरा और सभी यात्री सुरक्षित रहे। अलर्ट के वास्तविक कारण का पता तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।






