HSRP टूटी, मुड़ी या ढकी होने पर भी ईंधन पर रोक; पेट्रोल पंपों पर CCTV-ANPR चालू रखना और 30 दिन फुटेज सुरक्षित रखना होगा
अमृतसर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : कमिश्नरेट अमृतसर सिटी में अब बिना वैध और स्पष्ट नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल और CNG नहीं मिलेगी। पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक आगे और पीछे वैध हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) नहीं होने, प्लेट टूटने, मुड़ने, ढकी होने या उसके साथ छेड़छाड़ होने पर भी ईंधन देने से इनकार किया जाएगा। पुलिस के अनुसार अस्पष्ट अथवा बदली हुई नंबर प्लेट से CCTV और ANPR के जरिये वाहन की पहचान में परेशानी होती है। ऐसे वाहनों को हिट एंड रन, चोरी, लूट और चेन स्नैचिंग जैसी घटनाओं से जोड़कर पुलिस ने नंबर प्लेट की स्पष्टता को सुरक्षा और जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। हालांकि यह पुलिस का आधार/आकलन है, इसे अपराध में कमी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
पेट्रोल पंपों के लिए भी निर्देश
सभी पेट्रोल पंप, डीजल डिस्पेंसिंग स्टेशन और CNG स्टेशन संचालकों को पंजाबी और अंग्रेजी में कम से कम 3×3 फीट का सूचना बोर्ड लगाने को कहा गया है। CCTV और ANPR कैमरे लगातार चालू रखने होंगे तथा आने-जाने वाले वाहनों की नंबर प्लेट रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिन सुरक्षित रखनी होगी। बोतल या कंटेनर में पेट्रोल-डीजल देने पर भी रोक रहेगी।वैध अस्थायी पंजीकरण वाले नए वाहन तथा एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आवश्यक आपातकालीन वाहन इस प्रतिबंध से बाहर रखे गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने पर BNSS की धारा 223 और मोटर व्हीकल कानून की लागू धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है और 20 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहने की जानकारी दी गई है।
क्या देश में पहले भी ऐसा हुआ है?
अगस्त 2026 में गुजरात के राजकोट में भी इसी तरह का “No Number Plate, No Fuel” आदेश लागू किया गया था। वहां 17 अगस्त से पेट्रोल, डीजल और CNG के लिए स्पष्ट एवं वैध HSRP अनिवार्य की गई। अमल के कुछ ही दिनों में पुलिस ने बताया कि 18 अगस्त के बाद 157 बिना नंबर प्लेट वाले वाहन पकड़े गए और विवाद की स्थिति को देखते हुए करीब 15-17 पेट्रोल पंपों पर पुलिस तैनात करनी पड़ी। हालांकि राजकोट में अभी इतना समय नहीं बीता है कि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि इस नीति से अपराध में स्थायी कमी आई। उपलब्ध रिपोर्टों में मुख्यतः शुरुआती प्रवर्तन और पकड़े गए वाहनों के आंकड़े हैं। इसलिए अमृतसर के आदेश को “देश में सफल साबित हो चुका नियम” बताना अभी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।






