दो दुष्कर्म मामलों की जांच में गड़बड़ी और आरोपी को रिहाई दिलाने का लगाया आरोप; NHRC के बाद अब NCW में पहुंचा मामला
नई दिल्ली (जागरूक पंजाब न्यूज नेटवर्क) : पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान पर दुष्कर्म मामले को कथित तौर पर दबाने के लिए ₹5 करोड़ मांगने के आरोपों को लेकर राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता एवं बठिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल ने मंगलवार को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
हरसिमरत ने आयोग को सौंपे ज्ञापन में डॉ. गुरप्रीत कौर मान और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने तथा पंजाब के अमृतसर और मोहाली से जुड़े दो दुष्कर्म मामलों की जांच CBI को सौंपने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जांच को प्रभावित किया गया और दोनों मामलों में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर आरोपी को गिरफ्तारी के करीब दो महीने के भीतर जेल से बाहर कर दिया गया।
हरसिमरत ने दावा किया कि पांच महिलाओं ने मुख्यमंत्री से संबंधित व्यक्ति के खिलाफ शिकायत की थी, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। उनका आरोप है कि बाद में दो महिलाओं से जुड़े दुष्कर्म मामलों में भी पुलिस कार्रवाई को कमजोर किया गया। उन्होंने NCW से दोनों शिकायतकर्ता महिलाओं और उनके परिवारों के बयान सुरक्षित व गोपनीय माहौल में दर्ज कराने तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों—CCTV फुटेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग और कॉल रिकॉर्ड—को सुरक्षित रखने की मांग की।
हरसिमरत के अनुसार, मामले में आरोपी के रूप में सामने आए मीडिया इन्फ्लुएंसर गुरी चहल की भूमिका तथा पुलिस अधिकारियों द्वारा दाखिल की गई कैंसिलेशन रिपोर्ट की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पंजाब पुलिस के बजाय CBI पूरे घटनाक्रम की जांच करे।
हरसिमरत ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की भी मांग की और कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े आरोप होने के कारण पंजाब की एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने NCW से केंद्रीय गृह मंत्रालय को CBI जांच की सिफारिश करने की मांग भी रखी।
हालांकि आरोपों से इनकार: डॉ. गुरप्रीत कौर मान इन आरोपों को पहले ही बेबुनियाद, झूठे और राजनीतिक रूप से प्रेरित बता चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाने वाले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रणजीत सिंह को कानूनी नोटिस भी भेजा था। जस्टिस रणजीत सिंह ने कहा था कि वह नोटिस से डरने वाले नहीं हैं और मामले के तथ्य अदालत में सामने रखेंगे। आम आदमी पार्टी ने भी आरोपों को खारिज किया है।
पहले NHRC भी ले चुका है संज्ञान: इस विवाद की शुरुआत अगस्त में हुई, जब सेवानिवृत्त जस्टिस रणजीत सिंह की ओर से सामने आए आरोपों में कहा गया कि मुख्यमंत्री की पत्नी ने दुष्कर्म मामले को दबाने के लिए ₹5 करोड़ की मांग की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 21 अगस्त की कार्यवाही में मामले का संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और DGP को आरोपों की जांच कर दो सप्ताह में Action Taken Report देने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद डॉ. गुरप्रीत कौर ने जस्टिस रणजीत सिंह को कानूनी नोटिस भेजकर आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। जस्टिस सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह नोटिस का जवाब देने के बजाय जरूरत पड़ने पर अदालत में तथ्यों का सामना करेंगे।
अब हरसिमरत कौर के NCW पहुंचने से यह विवाद एक नए स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि अभी तक किसी अदालत या जांच एजेंसी की ओर से ₹5 करोड़ के लेन-देन या मुख्यमंत्री की पत्नी की संलिप्तता को प्रमाणित करने वाला कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।






