मोती बाग फ्लाईओवर के पास दिनदहाड़े वारदात ने खोली सुरक्षा दावों की पोल; सोने की अंगूठी और 15 हजार कैश लूटकर आराम से फरार हुए बदमाश।

जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : स्मार्ट सिटी का दावा करने वाला जालंधर शहर अब अपराधियों के हवाले हो चुका है। सरेआम बंदूकें तानकर बेखौफ घूम रहे लुटेरों के सामने पंजाब पुलिस पूरी तरह लाचार और नाकाम साबित हो रही है। ताजा मामला डीएवी यूनिवर्सिटी से कुछ ही दूरी पर स्थित मोती बाग फ्लाईओवर का है, जहां बेखौफ बदमाशों ने ‘दैनिक सवेरा’ के वरिष्ठ पत्रकार कुश चावला को निशाना बनाते हुए पुलिसिया गश्त और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं। तथ्य यह साबित करने के लिए काफी हैं कि शहर में अब न आम नागरिक सुरक्षित है और न ही लोकतंत्र का चौथा स्तंभ:
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हथियारों के बल पर दहशत का खेल : बदमाशों ने सरेराह वरिष्ठ पत्रकार कुश चावला को घेर लिया और जान से मारने की धमकी देकर हथियारों के बल पर वारदात को अंजाम दिया।
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लाखों का नुकसान, पुलिस नदारद : लुटेरे पत्रकार कुश चावला से सोने की अंगूठी और 15,000 कैश लूटकर बड़ी आसानी से रफूचक्कर हो गए, जबकि पुलिस का कोई अता-पता नहीं था।
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सुरक्षा तंत्र की नाकामी : जिस इलाके में यह वारदात हुई, वह मुख्य मार्ग का हिस्सा है। इसके बावजूद लुटेरों का इस तरह निडर होकर वारदात को अंजाम देना पुलिस की सुस्ती पर सीधा तमाचा है।
पुलिस का रटा-रटाया जवाब: “CCTV खंगाल रहे हैं”
हर बार की तरह, वारदात के बाद पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंचीं और लकीर पीटने का काम शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारियों का वही पुराना और घिसा-पिटा बयान सामने आया है कि “मामले की जांच जारी है और आसपास के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।”
सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक पुलिस सिर्फ घटना होने के बाद CCTV फुटेज देखने तक सीमित रहेगी? अपराध रोकने के लिए ज़मीन पर पुलिस की गश्त क्यों नज़र नहीं आती?
क्या सुरक्षित रह गया है जालंधर?
मोती बाग फ्लाईओवर जैसी मुख्य जगह पर एक जाने-माने पत्रकार के साथ हथियार दिखाकर लूटपाट होना यह साफ बयां करता है कि अपराधियों के दिल से खाकी का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। जब शहर के पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। पुलिस प्रशासन केवल बड़े-बड़े दावों में व्यस्त है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि जालंधर की सड़कों पर अपराधी राज कर रहे हैं और जनता दहशत के साए में जीने को मजबूर है।
जब कलम के सिपाही ही निशाने पर, ‘दैनिक जागरण’ के पत्रकार भी कई बार लुट चुके
जालंधर में पत्रकारों पर हमलों और लूटपाट का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी शहर में मीडिया कर्मी अपराधियों का शिकार बनते रहे हैं। ‘दैनिक जागरण’ के पत्रकार और मीडिया कर्मी भी कई बार शहर के लुटेरों के हत्थे चढ़ चुके हैं। फोकल प्वाइंट जैसे इलाकों में नाइट शिफ्ट खत्म कर लौट रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों को तेजधार हथियारों (दातर आदि) के बल पर लूटा जा चुका है। बार-बार मीडिया जगत के लोगों को निशाना बनाए जाने के बावजूद पुलिस प्रशासन ने शहर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और गश्त बढ़ाने की ज़हमत नहीं उठाई। सवाल यही है कि जब सच्चाई दिखाने वाली कलम चलाने वाले पत्रकार ही जालंधर में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की हिफाजत का दम भरने वाली पुलिस का वजूद किस काम का?





