सूबा प्रधान सुखजीत सिंह बोले- सूचियां जितनी मर्जी बनती रहें, कोई परवाह नहीं; मुलाजिम जत्थेबंदियों पर सरकार की सख्ती का नहीं असर
जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : महाबंद के दौरान ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों की सूचियां तैयार करने और कार्रवाई की चेतावनी देने के पंजाब सरकार के पत्र के बाद कर्मचारी जत्थेबंदियों ने भी सरकार को खुली चेतावनी दी है। सीपीएफ कर्मचारी यूनियन के सूबा प्रधान सुखजीत सिंह ने कहा कि सरकार जितनी मर्जी सूचियां तैयार करवा ले, कर्मचारी जत्थेबंदियां ऐसे पत्रों की कोई परवाह नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि 29 अगस्त को होने वाली सूबे की मीटिंग में मुख्यमंत्री को इसका जवाब दिया जाएगा।
सुखजीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरवार को कर्मचारियों के साथ होने वाली मीटिंग में भी नहीं आए। उनके मुताबिक कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करने के बजाय सरकार अब गैरहाजिरी की सूचियां तैयार करवाने में लगी है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों पर इस तरह के पत्रों का कोई असर नहीं है और मुलाजिम संगठन अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल पहले ही 17 से 26 अगस्त तक तय थी और 27 अगस्त को महाबंद का कार्यक्रम रखा गया था। ऐसे में सरकार की ओर से अब गैरहाजिर कर्मचारियों की सूचियां तैयार करवाने का फैसला कर्मचारियों को डराने का प्रयास है, लेकिन संगठन इससे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
सुखजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार के पास कर्मचारियों की मांगें पूरी करने के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए मुख्यमंत्री मीटिंग से पीछे हटने का बहाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि वीरवार को पीएपी के गोल्फ क्लब में सरकार के साथ मीटिंग रखी गई थी। इस दौरान प्रिंसिपल यादव केके यादव और अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ भी बैठक हुई।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों में लंबित डीए, पुरानी पेंशन स्कीम समेत कई मुद्दे शामिल हैं। कर्मचारी संगठनों ने इन मांगों को लेकर लगातार सरकार के समक्ष आवाज उठाई है। अब सरकार की ओर से कार्रवाई संबंधी पत्र जारी होने के बाद कर्मचारी संगठन इसे टकराव की दिशा में बढ़ता कदम मान रहे हैं।
सरकार के पत्र में सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कर सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी जाए। पत्र में लागू सेवा नियमों के तहत आगे आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई है। इसके जवाब में कर्मचारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि कार्रवाई की धमकी से आंदोलन कमजोर नहीं होगा।
सुखजीत सिंह, सूबा प्रधान सीपीएफ कर्मचारी यूनियन
“29 को सूबे की मीटिंग में सीएम को जवाब देंगे”
“सूचियां जितनी मर्जी बनती रहें, हमें कोई परवाह नहीं है। मुलाजिम जत्थेबंदियां ऐसे पत्रों की परवाह नहीं करतीं और न ही इनका मुलाजिम जत्थेबंदियों पर कोई असर है। जल्द ही इसका जवाब मुख्यमंत्री को दे दिया जाएगा। हड़ताल वैसे ही 17 से 26 अगस्त तक थी और 27 अगस्त को महाबंद था। सीएम वीरवार की मीटिंग से ही भाग गए। अगर सरकार के पास मुलाजिमों की मांगें पूरी करने के लिए पैसे नहीं हैं तो बहाना बनाने के बजाय खुलकर बात करनी चाहिए। 29 अगस्त की सूबे की मीटिंग में मुख्यमंत्री को इसका जवाब दिया जाएगा।”





