वेद मंदिर ढन्न मोहल्ला में रविवार्य सत्संग के दौरान विश्व कल्याण के लिए यज्ञ, भजनों से श्रद्धालु हुए भावविभोर

जालंधर, (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : दयानंद मठ वेद मंदिर ढन्न मोहल्ला में रविवार्य सत्संग का कार्यक्रम वेद मंदिर ढन्न मोहल्ला के प्रधान श्री आर्य मित्र गुप्ता जी की अध्यक्षता में श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत विश्व कल्याण के लिए यज्ञ के आयोजन से हुई। यज्ञ का ब्रह्मत्व आर्य प्रतिनिधि सभा के धर्माचार्य श्री अमित कुमार शास्त्री जी ने किया।
इस अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में लखनऊ से पधारे श्री राजेंद्र भंडारी जी ने अपने सहयोगी के साथ श्रद्धापूर्वक यजमान पद पर सुशोभित होकर आहुतियां समर्पित कीं।
यज्ञ के पश्चात श्री राजेश अमर प्रेमी व रमन आर्य जी ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
भजनों के बाद आर्य प्रतिनिधि सभा पंजाब के उपदेश श्री अमित शास्त्री जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ईश्वर ने संसार के समस्त पदार्थ प्राणियों के सुख के लिए बनाए हैं, लेकिन प्राणी उनमें से कितना सुख प्राप्त कर सकता है, यह उसके ज्ञान पर निर्भर करता है। संसार का कोई भी पदार्थ, प्राणी, जीव या ऐसी सामग्री नहीं है, जिसे ईश्वर ने मनुष्य के दुख के लिए बनाया हो। मनुष्य अपनी अज्ञानता के कारण ही दुख के सागर में फंस जाता है।
उन्होंने कहा कि जितने भी सुख के साधन हैं, अगर उनका अज्ञानता के साथ प्रयोग किया जाए तो वही साधन दुखदायी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना करके वेदों की ओर लौटने का जो आह्वान किया था, उसका एक ही उद्देश्य था कि व्यक्ति यह समझ सके कि संसार में उसे किस प्रकार से कर्म करने हैं। ज्ञानपूर्वक कर्म करने से ही उसका कल्याण हो सकता है और उसे सुख, शांति व समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है।
आचार्य अमित कुमार शास्त्री ने कहा कि यदि व्यक्ति ज्ञानपूर्वक कर्म नहीं करेगा तो उसे दुख और दरिद्रता का सामना करना पड़ेगा। जो व्यक्ति वेद मार्ग का राही बनकर संसार में अपना जीवन जीता है, वह संसार में समस्त सुखों और ऐश्वर्यों को भोगता हुआ मोक्ष मार्ग का राही बन पाता है। वहीं, जो व्यक्ति ज्ञान के मार्ग का राही नहीं बनता, वह दुखों से ग्रसित होकर संसार में भटकता रहता है और आवागमन के चक्कर में पड़ा रहता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को प्रत्येक कर्म ज्ञानपूर्वक करना चाहिए और ज्ञान का आदि स्रोत वेद है। इसलिए व्यक्ति को सदैव वेद ज्ञान के अनुसार जीवन जीने का प्रयास करते रहना चाहिए।
इस अवसर पर दयानंद मठ के संरक्षक सेठ कुंदन लालजी, सत्य शरण गुप्ता जी, प्रकाश चंद सुनेजा जी, कैलाश अग्रवाल जी, राकेश शर्मा जी, राम भवन शुक्ला जी, त्रिभुवन शुक्ला जी, पवन शुक्ला जी, निर्मल आर्य जी, सुदेश मित्तल जी, मीनाक्षी अरोड़ा जी, सुनीता प्रेमी जी, सुषमा महाजन जी, रिचा पूर्वी, मिलन आर्य जी आदि बहुत से सदस्यों का इस पावन यज्ञ में तन, मन व धन से सहयोग रहा। आर्य समाज के प्रधान श्री आर्य मित्र गुप्ता जी ने सभी का हार्दिक धन्यवाद किया। शांति पाठ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।






