पॉलिटेक्निक एडवाइजरी बोर्ड (PAB) बनाने की गाइडलाइंस रद्द करने की मांग, सभी संबंधित यूनियनों से औपचारिक विचार-विमर्श की मांग
जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में पढ़ाने वाले और तकनीकी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े पढ़े-लिखे कर्मचारी अब अपने ही संस्थानों के भविष्य को लेकर विरोध में हैं। उनका कहना है कि सरकार की नई व्यवस्था से सरकारी कॉलेजों के प्रशासनिक ढांचे, कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और संस्थानों की स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पॉलिटेक्निक कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन ने PAB गाइडलाइंस रद्द करने की मांग की है। जत्थेबंदी को सोसायटी गठन, बाहरी नियंत्रण और कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा को लेकर आपत्ति है।सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में पॉलिटेक्निक एडवाइजरी बोर्ड (PAB) गठित करने को लेकर जारी गाइडलाइंस का पॉलिटेक्निक कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन ने विरोध किया है। सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों के लेक्चरर, सीनियर लेक्चरर, विभागों के प्रमुख (HOD), मिनिस्ट्रियल स्टाफ, लैब असिस्टेंट और दर्जा चार कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली जत्थेबंदी ने डायरेक्टर, तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग, पंजाब को लिखित प्रतिनिधित्व (असहमति पत्र) सौंपकर इन गाइडलाइंस को रद्द करने की मांग की है। जत्थेबंदी के प्रधान, महासचिव, उपाध्यक्ष, प्रेस सचिव और संयुक्त सचिव ने कहा कि वे इंडस्ट्री और अकादमिक क्षेत्र के बीच तालमेल, विद्यार्थियों की इंटर्नशिप और प्लेसमेंट के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि मौजूदा गाइडलाइंस से सरकारी संस्थानों के ढांचे और कर्मचारियों के हितों पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
PAB को लेकर मुख्य आपत्तियां
समानांतर प्रशासनिक ढांचा: जत्थेबंदी का कहना है कि PAB को केवल सलाहकार बोर्ड के बजाय “मुख्य योजना और विकास संस्था” का स्वरूप दिया गया है। इसमें बाहरी इंडस्ट्री व्यक्ति को चेयरपर्सन और कॉलेज के प्रिंसिपल को केवल सदस्य सचिव बनाए जाने से सरकारी प्रशासनिक ढांचे के समानांतर एक गैर-सरकारी ढांचा खड़ा होने की स्थिति बनती है।
सोसायटी पंजीकरण और स्वामित्व का सवाल: जत्थेबंदी ने सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों को ‘सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860’ के तहत पंजीकृत करने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि इससे संस्थानों के स्वामित्व, संपत्तियों और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर अस्पष्टता पैदा हो सकती है। इस संबंध में जत्थेबंदी ने लहरागागा कॉलेज के असफल सोसायटी ढांचे का भी हवाला दिया है।
सरकारी नौकरियों और सेवा नियमों पर असर: जत्थेबंदी के अनुसार PAB को कोर्स बंद करने और स्टाफ की समीक्षा करने का अधिकार दिया गया है, लेकिन कैबिनेट द्वारा मंजूर पदों और नियमित स्टाफ की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। जत्थेबंदी की मांग है कि PAB को तबादलों, तैनाती, ACR या अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित कोई अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए।
मूल्यांकन को लेकर आपत्ति: जत्थेबंदी का कहना है कि विद्यार्थियों के दाखिले, ड्रॉप-आउट और निजी क्षेत्र में रोजगार जैसे परिणाम पूरी तरह शिक्षकों के नियंत्रण में नहीं होते। इसलिए इन लक्ष्यों को शिक्षकों की पदोन्नति या ACR से जोड़ना उचित नहीं है।
निजीकरण की आशंका: जत्थेबंदी ने कहा है कि सोसायटी का गठन, निजी/CSR फंडिंग और इंडस्ट्री-केंद्रित शासन व्यवस्था लागू करने से सरकारी संस्थानों पर निजीकरण और कॉरपोरेट प्रभाव बढ़ने की आशंका पैदा होती है।
नोटिफिकेशन वापस लेने की मांग, संघर्ष की चेतावनी
जत्थेबंदी ने मांग की है कि PAB की नई गाइडलाइंस संबंधी नोटिफिकेशन को तुरंत रद्द किया जाए और सभी संबंधित यूनियनों के साथ औपचारिक विचार-विमर्श किया जाए। जत्थेबंदी के अनुसार वर्ष 2007 में भी इसी तरह का सोसायटी ढांचा लागू करने का प्रयास किया गया था। उस समय ज्वाइंट एक्शन कमेटी (JAC) बनाकर किए गए विरोध के बाद सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था। जत्थेबंदी ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा नोटिफिकेशन वापस नहीं लिया गया तो पॉलिटेक्निक कॉलेजों से संबंधित यूनियनों की ओर से दोबारा ज्वाइंट एक्शन कमेटी गठित कर राज्य स्तर पर संघर्ष शुरू किया जाएगा।
नॉलेज बॉक्स… जत्थेबंदी के लिए संभावित कानूनी और प्रशासनिक कदम
1. पहले पूरी गाइडलाइंस और संबंधित आदेश हासिल करें
जत्थेबंदी को PAB से संबंधित पूरा नोटिफिकेशन, गाइडलाइंस, विभागीय आदेश, फाइल नोटिंग/स्वीकृति और यदि कोई कैबिनेट निर्णय है तो उसकी प्रति आधिकारिक माध्यम से हासिल करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर RTI के माध्यम से दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
2. लिखित आपत्तियों को बिंदुवार रिकॉर्ड पर लाएं
सरकार को दिए जाने वाले प्रतिनिधित्व में यह स्पष्ट किया जा सकता है कि किन प्रावधानों से नियमित कर्मचारियों की सेवा शर्तों, स्वीकृत पदों, संपत्ति और प्रशासनिक नियंत्रण पर असर पड़ने की आशंका है। हर आपत्ति के सामने संबंधित गाइडलाइन की धारा/क्लॉज का उल्लेख करना उपयोगी रहेगा।
3. सभी संबंधित यूनियनों की संयुक्त समिति बनाएं
यदि कई कर्मचारी संगठन प्रभावित हैं तो अलग-अलग प्रतिनिधित्व देने के बजाय दस्तावेजी रिकॉर्ड के साथ संयुक्त प्रतिनिधित्व किया जा सकता है। इससे मांगों को एक समान रूप में सरकार के सामने रखने में सुविधा होगी।
4. कानूनी राय लेकर हाईकोर्ट का विकल्प देखें
यदि विभागीय स्तर पर प्रतिनिधित्व के बाद भी ऐसा आदेश लागू किया जाता है जिससे कर्मचारियों के वैधानिक/सेवा संबंधी अधिकार प्रभावित होने का दावा बनता है, तो पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में उचित कानूनी उपाय, जिसमें परिस्थितियों के अनुसार रिट याचिका भी शामिल हो सकती है, वकील से जांचा जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट की रिट क्षेत्राधिकार संबंधी व्यवस्था लागू होती है। अंतिम कदम मूल नोटिफिकेशन और संबंधित सेवा नियमों की कानूनी जांच के बाद ही तय किया जाना चाहिए।
5. सोसायटी बनने की स्थिति में संपत्ति और नियंत्रण की अलग कानूनी जांच कराएं
‘Societies Registration Act, 1860’ में सोसायटी की संपत्ति और प्रबंधन से संबंधित अलग-अलग प्रावधान हैं। इसलिए केवल “सोसायटी” शब्द के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय यह जांचना जरूरी होगा कि प्रस्तावित ढांचे में सरकारी जमीन, भवन, उपकरण, फंड और प्रशासनिक अधिकार किसके पास रहेंगे।
6. अंतरिम राहत की संभावना वकील से पूछें
यदि नोटिफिकेशन लागू होने से तत्काल सेवा संबंधी या संस्थागत बदलाव होने की आशंका हो, तो वकील से यह भी पूछा जा सकता है कि याचिका के साथ अंतरिम राहत/स्टे की मांग कानूनी रूप से बनती है या नहीं।






