28 अगस्त को राखी: जानिए भद्रा का साया है या नहीं, शुभ मुहूर्त में बांधें राखी; यह है रक्षाबंधन की पौराणिक कहानी

इस दिन चंद्र ग्रहण नहीं, यह मात्र अफवाह…


जालंधर (जागरूक पंजाब):
भाई-बहन के अटूट प्रेम र विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार 28 अगस्त को पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधकर उनकी लंबी उम्र, सफलता और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करती हैं, वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनकी ताउम्र रक्षा करने का वचन देते हैं।

28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस बार 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा, जो कि अत्यंत शुभ माना जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना वर्जित होता है, लेकिन इस बार पूरा दिन शुभ मुहूर्त में राखी बांधी जा सकती है।

  • राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त: 28 अगस्त को सुबह 06:15 AM से लेकर दोपहर 01:30 PM तक रहेगा।

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 PM से 12:55 PM तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

(नोट: 28 अगस्त को किसी भी प्रकार का चंद्र ग्रहण नहीं है, इसलिए सभी धार्मिक अनुष्ठान और राखी बांधने का कार्य बिना किसी शंका के पूरे विधि-विधान से संपन्न किया जा सकता है।)

रक्षाबंधन का इतिहास और पौराणिक कहानी

रक्षाबंधन की शुरुआत को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें से सबसे प्रमुख कथा भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध करने के लिए अपना सुदर्शन चक्र चलाया था, तो उनकी उंगली कट गई थी और उससे खून बहने लगा था। यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का आंचल (पल्लू) फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया था। द्रौपदी के इस स्नेह और भाव से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वचन दिया था कि वे हर संकट में उनकी रक्षा करेंगे।

इसी वचन को निभाते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत काल में चीरहरण के समय द्रौपदी की लाज बचाई थी। माना जाता है कि तभी से बहन द्वारा भाई को रक्षासूत्र बांधने और भाई द्वारा रक्षा का वचन देने की यह परंपरा चली आ रही है।

पूजा की सही विधि

राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार करें। थाली में रोली, अक्षत (चावल), दीपक, मिठाई और राखी रखें। सबसे पहले अपने कुलदेवता और भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद भाई के माथे पर तिलक लगाएं, अक्षत लगाएं और दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। तत्पश्चात भाई की आरती उतारें और उन्हें मिठाई खिलाएं।

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