CMO से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले की जांच के बीच सवाल—क्या जांच का दायरा जालंधर तक और बढ़ेगा?
मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब
जालंधर : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद जालंधर के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। 13 अक्टूबर 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने घुम्मन के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार और सरकारी फैसलों को प्रभावित करने से जुड़े मामले में केस दर्ज किया। इससे पहले CBI भी घुम्मन समेत छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर चुकी है।
इस घटनाक्रम के बीच आम आदमी पार्टी के नेता कालिया का नाम भी राजनीतिक चर्चा में है। का*लिया ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन का करीबी है। जानकारी के मुताबिक कथित ट्रांसफर-पोस्टिंग मामले से जुड़े ED और CBI के केस विवरण में उनका नाम आया था।
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के मामलों पर भी उठ रहे सवाल
जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट पहले भी विभिन्न विवादों और जांचों के कारण चर्चा में रहा है। वर्ष 2022 में ट्रस्ट की 120 फाइलें गुम होने के मामले में तत्कालीन चेयरमैन दलजीत सिंह आहलूवालिया के खिलाफ FIR दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। वर्ष 2024 में ट्रस्ट की संपत्तियों की कथित फर्जी रजिस्ट्रियों से जुड़े अलग मामले में FIR दर्ज होने की रिपोर्ट भी सामने आई थी। लेकिन इन पुराने मामलों और घुम्मन के खिलाफ मौजूदा जांच के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित करने वाला पुष्ट दस्तावेज फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
क्या जांच का दायरा और बढ़ सकता है?
घुम्मन के खिलाफ कार्रवाई के बाद यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या जांच एजेंसियां सरकारी फैसलों, ट्रांसफर-पोस्टिंग और संपत्ति से जुड़े कथित मामलों में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच करेंगी।





