जालंधर (जागरूक पंजाब) : टांडा रोड के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र में कथित तौर पर GST चोरी और फर्जी बिलिंग के एक संगठित नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय व्यापारिक हलकों में चर्चा है कि क्षेत्र का एक प्रमुख व्यापारी, जिसका नाम ‘M’ अक्षर से शुरू होता है, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बनकर यह गेम चला रहा है। आरोप हैं कि ऐसे बोगस बिल तैयार किए जा रहे हैं, जिनके पीछे वास्तविक माल की कोई आवाजाही या आपूर्ति (Physical Delivery) नहीं है।
यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाने का मामला है, बल्कि ईमानदारी से टैक्स चुकाने वाले व्यापारियों के साथ भी सीधा अन्याय है।
कैसे रचा जा रहा है फर्जीवाड़े का जाल?
GST व्यवस्था में फर्जी इनवॉइस (Fake Invoicing) के जरिए Input Tax Credit (ITC) का अवैध लाभ उठाना एक गंभीर अपराध है। टांडा रोड क्षेत्र से सामने आ रहे विवरणों के अनुसार, यह संदिग्ध नेटवर्क मुख्य रूप से तीन तरीकों से काम कर रहा है:
कागजी लेन-देन (Paper Transactions): बिना माल की वास्तविक सप्लाई के केवल जाली इनवॉइस जारी करके कागजों पर करोड़ों रुपये का टर्नओवर दिखाना।
सर्कुलर बिलिंग (Circular Billing): एक ही माल या काल्पनिक स्टॉक को अलग-अलग शेल कंपनियों और फर्जी फर्मों के बीच घुमाकर फर्जी ITC जनरेट करना।
स्टॉक और बिल में अंतर: ई-वे बिल (E-Way Bill) में दर्ज विवरण और वास्तविक माल की आवाजाही के बीच भारी अंतर होना।
व्यापारी ‘M’ द्वारा कथित रूप से चलाए जा रहे इस नेटवर्क के जरिए अन्य व्यापारियों को भी बिना माल बेचे क्रेडिट पास करने का दावा किया जा रहा है, जो पूरे बाजार के वित्तीय ढांचे को प्रभावित कर रहा है।
अधिकारियों की मिलीभगत और कार्रवाई न होने पर संवैधानिक/कानूनी प्रावधान
इतने बड़े स्तर पर कथित फर्जी बिलिंग का खेल लंबे समय से चलने के बावजूद GST विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होना, विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि जांच में यह साबित होता है कि अधिकारियों की सांठगांठ या लापरवाही के कारण यह टैक्स चोरी हो रही है, तो उनके खिलाफ निम्नलिखित सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है:
GST कानून के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई: Central/State GST Act की धारा 132 और प्रशासनिक नियमों के तहत कर चोरी में सहायता करने या अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ निलंबन (Suspension) और विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश दिए जा सकते हैं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act): यदि अधिकारियों द्वारा व्यापारी ‘M’ को शह देने या रिश्वत लेकर मामला दबाने के सबूत मिलते हैं, तो PC Act की धाराओं के तहत आपराधिक मामला (FIR) दर्ज हो सकता है।
विजिलेंस और सीबीआई जांच: राज्य विजिलेंस ब्यूरो या केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBIC) की आंतरिक सतर्कता शाखा मामले को संज्ञान में लेकर संबंधित अधिकारियों की संपत्ति और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच कर सकती है।





