अरविंद केजरीवाल का केंद्र सरकार पर हमला: “एथेनॉल नीति बनी चीनी संकट की वजह, आयात शुल्क शून्य कर चीन को पहुंचाया जा रहा फायदा”

आप संयोजक का आरोप—देश में चीनी के दाम अनियंत्रित रूप से बढ़े; जिस गन्ने से चीनी बननी थी, उसे एथेनॉल में बदला और अब चीनी आयात करने की नौबत आई

नई दिल्ली (जागरूक पंजाब) : आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की व्यापारिक और कृषि नीतियों पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने चीनी के आयात शुल्क (Import Duty) को घटाकर शून्य कर दिया है, जिससे सीधे तौर पर चीनी आयात को बढ़ावा मिलेगा।

केजरीवाल ने देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और इसकी किल्लत के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की एथेनॉल नीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने तर्क दिया कि देश में चीनी की कमी इसलिए हुई है क्योंकि जिस गन्ने से चीनी तैयार की जानी थी, उस गन्ने की एक बड़ी मात्रा (लगभग 30 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने) को एथेनॉल बनाने में डायवर्ट कर दिया गया।
केजरीवाल ने अपने बयान के जरिए सरकार की ‘ऊर्जा सुरक्षा’ बनाम ‘खाद्य सुरक्षा’ की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए इसे एक बड़ा नीतिगत विरोधाभास बताया है।

विदेश मुद्रा बचत के दावे पर कसा तंज

केजरीवाल ने सरकार की नीति में विरोधाभास बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार दावा करती है कि एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाकर देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाया गया है। लेकिन अब उसी बचाई गई विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल विदेश (विशेषकर चीन) से चीनी आयात करने के लिए किया जा रहा है। केजरीवाल ने इस पूरी चक्रिय प्रक्रिया को सरकार की दूरदर्शिता की कमी और नीतिगत विफलता करार दिया।

अरविंद केजरीवाल के बयान के मुख्य बिंदु

  • आयात शुल्क शून्य: केंद्र सरकार ने चीनी के आयात को बढ़ावा देने के लिए आयात शुल्क खत्म कर दिया।

  • कीमतों में उछाल: देश में चीनी की किल्लत के कारण कीमतें अनियंत्रित रूप से बढ़ रही हैं।

  • एथेनॉल डायवर्जन: लगभग 30 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए कर दिया गया।

  • विदेशी मुद्रा पर सवाल: एथेनॉल से जो विदेशी मुद्रा बचाई गई, अब उसी से चीनी आयात की जा रही है।

खबर के मायने और आर्थिक पृष्ठभूमि

  • नीतिगत संतुलन का संकट: भारत सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) को बढ़ावा दे रही है, ताकि कच्चे तेल का आयात कम हो सके। हालांकि, जब चीनी का घरेलू उत्पादन घटता है, तो एथेनॉल बनाम चीनी का संतुलन बिगड़ जाता है।

  • उपभोक्ताओं पर असर: घरेलू बाजार में आपूर्ति कम होने से आम जनता को चीनी के बढ़े हुए दामों का सामना करना पड़ता है।

  • व्यापार घाटा: चीनी की कमी पूरी करने के लिए शून्य ड्यूटी पर आयात की अनुमति देने से घरेलू कीमतों पर तो नियंत्रण आ सकता है, लेकिन यह सरकार की पिछली बचत के दावों पर सवाल खड़े करता है।

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