नई दिल्ली (जागरूक पंजाब न्यूज नेटवर्क) : बाल विवाह के खिलाफ भारत की मुहिम को वैश्विक स्तर पर बड़ी मान्यता मिली है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर को 27 नवंबर को बाल, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इस तारीख का भारत से खास संबंध है। केंद्र सरकार ने 27 नवंबर 2024 को ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरू किया था। बाल अधिकार कार्यकर्ता और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) के संस्थापक भुवन ऋभु ने संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की पहल को आगे बढ़ाया। सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो के समर्थन के बाद 67 देशों के अनुमोदन वाला प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में लाया गया, जिसे मंजूरी मिल गई।
JRC के अनुसार उसका नेटवर्क भारत के सभी 782 जिलों में सहयोगी संगठनों के साथ बाल संरक्षण और बाल विवाह रोकने के लिए काम कर रहा है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार 2023-24 में 20 से 24 वर्ष की महिलाओं में 18 वर्ष से पहले विवाह का अनुपात 20.1 फीसदी रहा, जो NFHS-5 के 23.3 फीसदी से कम है। इस संबंध में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन की मेंबर जागृति ने कहा कि भारत की मुहिम को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलना विश्व में अपने आप में एक उपलब्धि है।






