सरकार से सवाल- खजाना खाली तो बाकी योजनाओं के लिए पैसा कहां से आ रहा?

जालंधर: नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री का पुतला फूंका और सरकार को गहरी नींद से जगाने की कोशिश की। इस दौरान यूनियन ने पंजाब सरकार की दोहरी नीति और कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए।
एनएचएम एम्प्लॉइज यूनियन के जिला अध्यक्ष डॉ. पंखुड़ी ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ तो सरकार अपने विज्ञापनों और अन्य योजनाओं पर बेहिसाब पैसा पानी की तरह बहा रही है, लेकिन दूसरी ओर इस महंगाई के दौर में जब एनएचएम कर्मी अपनी तनख्वाहों में सम्मानजनक वृद्धि की मांग करते हैं, तो खाली खजाने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। यूनियन ने सरकार से तीखा सवाल पूछा कि जब खजाना खाली है तो अन्य योजनाओं के लिए पैसा कहां से आ रहा है?
यूनियन के डॉ. सुमीत कपाही ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि अपनी मांगों को लेकर यूनियन और सरकार के बीच 50 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद ठेके पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। इसी के विरोध स्वरूप एनएचएम एम्प्लॉइज यूनियन पंजाब ने 17 अगस्त से 24 अगस्त तक हड़ताल का ऐलान किया था। इस हड़ताल के कारण राज्यभर में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
हड़ताल के दौरान एनएचएम कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पिट-स्यापा करते हुए विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मुख्य मांगों—जैसे वेतन में सम्मानजनक वृद्धि, ग्रेच्युटी और सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) की आयु सीमा में बढ़ोतरी—को तुरंत पूरा नहीं करती है, तो आने वाले समय में सरकार को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मचारी इसका करारा जवाब आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान देंगे।
प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए परमवीर ने साफ शब्दों में कहा कि यदि सरकार उनकी जायज मांगों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान नहीं करती, तो एनएचएम यूनियन द्वारा सरकार का हर मोड़ पर घेराव किया जाएगा।
वहीं प्रेस से बातचीत करते हुए डॉ. सुरभि, तनवी और उनके साथियों ने साझी आवाज में कहा कि सरकार और संबंधित विभाग को तुरंत उनकी हक्की मांगों को मानते हुए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने फिर से टाल-मटोल की नीति अपनाई, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने और जल्द ही स्टेट हेडक्वार्टर चंडीगढ़ का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे। इस हड़ताल के कारण प्रभावित होने वाली समस्त स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की होगी।





