
मनप्रीत बादल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाना पंजाब के लिए भाजपा की बड़ी रणनीति
चंडीगढ़/जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से करीब एक साल पहले भाजपा ने पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान करते हुए मनप्रीत बादल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी। यह नियुक्ति सिर्फ संगठन में पद बढ़ाने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि पंजाब में भाजपा के विस्तार और चुनावी रणनीति के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मौके भाजपा कार्यालय में तरुण चुघ समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।
मनप्रीत बादल का राजनीतिक सफर भाजपा के लिए उनकी बड़ी ताकत है। उनका सियासी सफर शिरोमणि अकाली दल से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने अपनी पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब बनाई, कांग्रेस में गए और जनवरी 2023 में भाजपा में शामिल हुए। वह पंजाब के वित्त मंत्री रह चुके हैं और लंबे समय तक विधानसभा की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय संगठन में जगह देकर पंजाब के साथ-साथ देशभर में क्षेत्रीय राजनीति की समझ रखने वाले नेता के तौर पर इस्तेमाल करने का संकेत दिया है।
कब और कैसे तैयार हुई जमीन?
मनप्रीत बादल को राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिलने की जमीन पिछले कुछ समय से तैयार होती दिखाई दे रही थी। भाजपा ने 2024 के गिद्दड़बाहा उपचुनाव में उन्हें मैदान में उतारकर उनकी जमीनी राजनीतिक पकड़ को परखा। वह लंबे समय से गिद्दड़बाहा क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और 30 साल से अधिक पुराने राजनीतिक संपर्कों को चुनावी अभियान में इस्तेमाल करते रहे हैं। इसके बाद 2026 में भाजपा ने पंजाब संगठन में भी दूसरे दलों से आए अनुभवी नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं। पार्टी की नई पंजाब टीम में 12 उपाध्यक्षों में से छह ऐसे नेता हैं, जो कांग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि भाजपा पंजाब में केवल अपने परंपरागत संगठन के सहारे नहीं, बल्कि अलग-अलग दलों से आए राजनीतिक अनुभव और सामाजिक संपर्क वाले चेहरों को जोड़कर अपना आधार बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
भाजपा इसे किस नजर से देख रही?
भाजपा की रणनीति अब पंजाब में खुद को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने की है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बैठकों में 2027 में सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर चर्चा हो चुकी है। बेरोजगारी, नशा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भी चुनावी एजेंडे में प्रमुखता देने की तैयारी बताई गई है। ऐसे में मनप्रीत बादल जैसे अनुभवी पंजाबी नेता को राष्ट्रीय टीम में शामिल करना राज्य की राजनीति को राष्ट्रीय संगठन से जोड़ने की दिशा में अहम कदम है।
किस पार्टी को कितनी चोट?
शिरोमणि अकाली दल : सबसे दिलचस्प असर यहां दिखाई दे सकता है। मनप्रीत बादल की राजनीतिक जड़ें अकाली दल और बादल परिवार की राजनीति से जुड़ी रही हैं। इसलिए उनका भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर उभरना अकाली राजनीति के लिए प्रतीकात्मक चुनौती है। खासकर ऐसे समय में जब अकाली दल के भीतर अलग-अलग धाराएं सक्रिय हैं और पंथक राजनीति को फिर मजबूत करने की कोशिशें चल रही हैं।
कांग्रेस : मनप्रीत बादल लंबे समय तक कांग्रेस में भी रहे हैं। उनका राष्ट्रीय कद बढ़ना कांग्रेस के लिए भी राजनीतिक संदेश है कि उसके पुराने प्रभावशाली चेहरों को भाजपा अपने साथ जोड़कर राष्ट्रीय भूमिका दे रही है।
आम आदमी पार्टी : इसका असर कुछ अलग तरीके से होगा। भाजपा अगर मनप्रीत बादल के जरिये मालवा और खासकर पुराने राजनीतिक नेटवर्क को सक्रिय करती है तो आम आदमी पार्टी के खिलाफ विपक्षी स्पेस में भाजपा की दावेदारी मजबूत हो सकती है।
2027 के लिए बड़ा संकेत
मनप्रीत बादल की नियुक्ति को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भाजपा और अकाली दल के संभावित रिश्ते को लेकर पंजाब में चर्चाएं चल रही हैं। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद गठबंधन की अटकलें तेज हुई थीं, हालांकि भाजपा की ओर से अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेत भी लगातार दिए गए हैं। ऐसे माहौल में मनप्रीत बादल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाना यह संदेश देता है कि भाजपा पंजाब में अपने संगठन और नेतृत्व की ताकत को स्वतंत्र रूप से बढ़ाने पर गंभीरता से काम कर रही है।
यानी मनप्रीत बादल को मिली राष्ट्रीय जिम्मेदारी को सिर्फ पदोन्नति के रूप में देखना अधूरा होगा। यह भाजपा की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा दिखाई देती है, जिसमें 2027 के पंजाब चुनाव से पहले पुराने राजनीतिक नेटवर्क, अनुभवी चेहरों और नए संगठनात्मक विस्तार को एक साथ जोड़ने की कोशिश हो रही है।





