मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब
जालंधर : पंजाब सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम के तहत जालंधर कमिशनरेट पुलिस रविवार को पूरे लवाजमे के साथ सड़कों और संकरे मोहल्लों में उतरी। पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह (IPS) की अगुवाई में 12 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और 300 जवानों की 30 अलग-अलग टीमों ने शहर के एक दर्जन से अधिक नशा प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में ‘कासो’ (CASO – Search and Seizure Operation) चलाया। ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई, संदिग्ध ठिकाने खंगाले गए और 14 लोगों को हिरासत में भी लिया गया।
लेकिन, इस बड़े-स्तरीय और हाई-टेक ऑपरेशन के बाद पुलिस महकमे का जो आधिकारिक प्रेस बयान सामने आया, उसने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
नशा तस्कर धरे गए, पर नशा कहां है?

पुलिस द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रेस नोट में 300 मुलाजिमों की तैनाती, 12 इलाकों में छापेमारी, ड्रोन से निगरानी और 14 लोगों को काबू करने की जानकारी तो बड़े फक्र से दी गई है, लेकिन इस समूचे ऑपरेशन के दौरान कितना नशा, नशीले पदार्थ या अवैध नकदी बरामद हुई—इस बारे पुलिस साइलेंट है।बयान में केवल इतना कहा गया कि 14 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी अगले प्रेस नोट में दी जाएगी।
कागजी खानापूर्ति या धरातल पर कार्रवाई?


लोगों का दबी आवाज में कहना है कि नशा तस्करी पर नकेल कसने के लिए इस तरह के भारी-भरकम पुलिस बेड़े का जमीनी स्तर पर उतरना सराहनीय है, लेकिन जब इतने बड़े स्तर पर 300 जवानों की मौजूदगी में छापेमारी होती है, तो परिणाम भी सामने आने चाहिए। बरामदगी के आंकड़े सार्वजनिक न करना भी एक बड़ा सवाल है।






