पॉक्सो के बढ़ते मामलों के बीच बड़ा कदम

नई दिल्ली/जालंधर (जागरूक पंजाब ब्यूरो): देश में किशोरों के बीच बढ़ते अपराध, यौन शोषण और नासमझी में उठाए कदमों के कारण खराब हो रहे भविष्य को लेकर एक बेहद युगांतकारी कदम उठाया जा रहा है। भारत के स्कूली शिक्षा तंत्र में अब एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है, जिसके तहत देशभर के स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम (Syllabus) में ‘कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन’ (व्यापक यौन शिक्षा) को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा. सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष इस विषय पर अपनी पूरी सहमति जता दी है. शीर्ष अदालत से अंतिम हरी झंडी मिलने के बाद इस नई व्यवस्था को देशव्यापी स्तर पर लागू कर दिया जाएगा.
बच्चों और किशोरों की सुरक्षा व जागरूकता है मुख्य उद्देश्य
इस नीति का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों और किशोरों को उनकी उम्र के अनुकूल बिल्कुल सटीक, वैज्ञानिक और सुरक्षित जानकारी देना है. अक्सर जागरूकता और सही मार्गदर्शन के अभाव में किशोर भटक जाते हैं या बाल यौन शोषण का शिकार हो जाते हैं। नए पाठ्यक्रम में शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों, यौन व प्रजनन स्वास्थ्य, ‘सहमति’ (Consent) के महत्व, सुरक्षित व्यवहार और विशेष रूप से बाल यौन शोषण से सुरक्षा (Safety from Child Sexual Abuse) जैसे बेहद संवेदनशील और जरूरी विषयों को शामिल करने का प्रस्ताव है.
‘पॉक्सो’ (POCSO) के पेचीदा मामलों और किशोरों के भविष्य पर कोर्ट की चिंता
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एक बेहद गंभीर सामाजिक और कानूनी समस्या पर चिंता व्यक्त की थी. कोर्ट का मानना है कि कई मामलों में 16 से 18 वर्ष की उम्र के किशोर आपसी सहमति या नासमझी में संबंध बनाकर घर छोड़ देते हैं. इसके बाद, अक्सर उनके माता-पिता या परिवार द्वारा सामाजिक प्रतिष्ठा या ‘झूठे सम्मान’ (Honor) के नाम पर कानून का दुरुपयोग करते हुए दूसरे पक्ष के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत गंभीर आपराधिक मामले दर्ज करा दिए जाते हैं.
इस प्रक्रिया में कई बार कानून के पेचीदा मोड़ों के कारण बच्चों का पूरा भविष्य और करियर समय से पहले ही तबाह हो जाता है. इसी गंभीर चिंता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस सामाजिक बुराई और कानूनी उलझन को जड़ से खत्म करने के लिए शिक्षा के स्तर पर ही जागरूकता फैलाने का फैसला किया है.
26 सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल की रिपोर्ट पर बनी सहमति
इस संवेदनशील मुद्दे की गहराई से जांच करने और आपसी सहमति से संबंध बनाने वाले किशोरों की निजता (Privacy) की रक्षा के लिए सरकार द्वारा एक उच्च स्तरीय विशेष पैनल का गठन किया गया था. एक एडिशनल सेक्रेटरी की अगुवाई में बने इस 26 सदस्यीय पैनल ने देश की वर्तमान स्थिति और कानूनी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श करने के बाद यह विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है.
NCERT तैयार करेगा नया सिलेबस, नियुक्त होंगे एक्सपर्ट टीचर्स
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस नए और विशेष पाठ्यक्रम को तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को सौंपी जाएगी. यह पूरी योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही तैयार और संचालित की जाएगी.
विशेषज्ञ समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि बच्चों को प्रारंभिक स्तर (प्राइमरी स्कूल) से ही उनकी उम्र के हिसाब से धीरे-धीरे यह शिक्षा दी जानी चाहिए. इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्कूलों में विशेष रूप से प्रशिक्षित और एक्सपर्ट शिक्षकों (Expert Teachers) की नियुक्ति की बात भी कही गई है, ताकि बच्चों को बिना किसी झिझक के सही मार्गदर्शन मिल सके.
💡 नॉलेज बॉक्स: क्या है ‘कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन’?
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केवल शारीरिक शिक्षा नहीं: यह सिर्फ शारीरिक बदलावों की जानकारी नहीं है, बल्कि यह बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श (Good Touch & Bad Touch) की पहचान करना सिखाती है.
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सहमति (Consent) का पाठ: किशोरों को यह समझाना कि किसी भी रिश्ते में सामने वाले की मर्जी और सम्मान कितना जरूरी है, ताकि वे भविष्य में किसी भी तरह के यौन अपराध का हिस्सा न बनें.
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भावनात्मक परिपक्वता: उम्र के साथ हार्मोन्स में होने वाले बदलावों और मानसिक तनाव को संभालने की समझ विकसित करना।

