बोले- न El Niño का असर भांपा, न पावर प्लानिंग की; महंगी बिजली खरीदकर सरकारी थर्मल प्लांटों को पूरी क्षमता पर नहीं चला रही सरकार
जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : पंजाब में बिजली संकट को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, कपूरथला विधायक और पूर्व बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा बिजली संकट को सरकार की “घोर अक्षमता, अनुभवहीनता और कुप्रबंधन” का नतीजा करार देते हुए कहा कि सरकार की नाकामी का खामियाजा किसान, उद्योग और आम उपभोक्ता भुगत रहे हैं। राणा गुरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने El Niño के कारण कमजोर मानसून के संभावित असर का समय रहते आकलन नहीं किया। उनके मुताबिक राष्ट्रीय और वैश्विक मौसम एजेंसियों की चेतावनियों के बावजूद सरकार ने धान के सीजन से पहले पर्याप्त बिजली रिजर्व, कोयला स्टॉक, पावर बैंकिंग और ग्रिड की आकस्मिक योजना तैयार नहीं की। इस मौके राणा दीपक सलवान एमसी, कुलजीत सिंह थिंद एमसी, नरेन वशिष्ठ एमसी व अन्य मौजूद थे।
करीब ₹4 की बिजली छोड़ ₹10 से ज्यादा में खरीदने का आरोप
पूर्व बिजली मंत्री ने राज्य के सरकारी थर्मल प्लांटों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि लेहरा मोहब्बत, रोपड़ और श्री गोइंदवाल साहिब जैसे सरकारी बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता से नहीं चलाया जा रहा। राणा के मुताबिक सरकार कोयले की कमी का हवाला दे रही है, जबकि उनके अनुसार लेहरा मोहब्बत में 13 दिन, रोपड़ में 28 दिन और श्री गोइंदवाल साहिब में 18 दिन का कोयला स्टॉक मौजूद है।
उन्होंने दावा किया कि एक तरफ घरेलू बिजली उत्पादन कम किया जा रहा है और दूसरी तरफ पावर एक्सचेंज से ₹10 प्रति यूनिट से ज्यादा की दर पर महंगी बिजली खरीदी जा रही है, जबकि घरेलू उत्पादन करीब ₹4 प्रति यूनिट में हो सकता है।
₹22 हजार करोड़ की सब्सिडी बकाया होने का दावा
राणा गुरजीत सिंह ने पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (PSERC) की ARR कार्यवाही का हवाला देते हुए कहा कि नवंबर 2025 में करीब ₹22,000 करोड़ की सब्सिडी की मांग उठी थी। उनके मुताबिक फरवरी 2026 में सरकार ने पूरी बकाया राशि देने में असमर्थता जताई और करीब ₹15,000 करोड़ ही दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके चलते PSPCL के पास रोजमर्रा के संचालन के लिए भी पर्याप्त फंड नहीं बचा।
उन्होंने दावा किया कि PSPCL को अपने खर्च, ईंधन खरीद, बिजली खरीद और कर्मचारियों की पेंशन जैसी जरूरतों के लिए पहली बार निजी lenders से करीब ₹10,000 करोड़ का कर्ज लेने की स्थिति में पहुंचाया गया है।
PSPCL-PSTCL के नेतृत्व पर भी सवाल
राणा गुरजीत सिंह ने PSPCL और PSTCL के शीर्ष पदों पर नियुक्तियों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीकी और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण पदों पर अनुभवहीन लोगों को बैठाया गया है, जबकि बिजली क्षेत्र जैसे तकनीकी सिस्टम को अनुभवी नेतृत्व की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में बैठे अधिकारी PSPCL को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरी तरफ स्टाफ की विभिन्न श्रेणियों में हड़तालें चल रही हैं। राणा ने इसे सरकार के कुप्रबंधन और अनुभवहीनता का संकेत बताया।
“रिव्यू मीटिंग तक नहीं हुईं, सरकार संकट आने के बाद जागी”
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि गर्मी और धान के सीजन से पहले बिजली की मांग, कोयले के भंडार और बिजली खरीद की समीक्षा के लिए होने वाली जरूरी समीक्षा बैठकें तक नहीं की गईं। उन्होंने कहा कि सरकार पहले से तैयारी करने के बजाय ग्रिड पर संकट आने के बाद जाग रही है।
उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर किसानों, उद्योग और घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। उनके मुताबिक किसानों को निर्बाध बिजली न मिलने से धान की सिंचाई प्रभावित हो रही है, जबकि मंडी गोबिंदगढ़, लुधियाना और जालंधर के औद्योगिक क्षेत्रों में अनियमित बिजली कटों से उद्योगों को नुकसान हो रहा है।
सरकार से श्वेत पत्र और स्वतंत्र ऑडिट की मांग
राणा गुरजीत सिंह ने सरकार से बिजली प्रबंधन पर White Paper जारी करने की मांग की। इसमें सरकारी थर्मल प्लांटों के रोजाना Plant Load Factor, कोयले के स्टॉक और पिछले दो वर्षों में स्पॉट मार्केट से खरीदी गई बिजली पर खर्च की गई राशि का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग रखी।
उन्होंने महंगी आपातकालीन बिजली खरीद की स्वतंत्र तकनीकी जांच, PSPCL और PSTCL के नेतृत्व में अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञों को लाने तथा बिजली व्यवस्था से जुड़ी समीक्षा समितियों को दोबारा सक्रिय करने की मांग की।
राणा गुरजीत सिंह ने चेतावनी दी कि बिजली पंजाब की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है और अगर सरकार ने तुरंत अपनी कार्यप्रणाली नहीं सुधारी तो कांग्रेस किसानों, उद्योगपतियों और आम जनता के साथ सड़कों पर उतरकर सरकार को जवाबदेह बनाएगी।





