सांसद चुघ ने बोरी-सेखों की AAP एंट्री से लेकर मोहनजीत टॉर्चर तक चुघ ने DGP से पूछे सवाल
चंडीगढ़ (जागरूक पंजाब न्यूज नेटवर्क) : पंजाब में अपराध और राजनीति के गठजोड़ को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ ने भगवंत मान सरकार और पंजाब पुलिस को घेरा है। चुघ ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करने के साथ पंजाब के डीजीपी को पत्र लिखकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका मुख्य सवाल यह है कि जिस व्यक्ति के पुलिस अधिकारियों के साथ निजी डिनर में शामिल होने के मामले में पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी, वही व्यक्ति आज आम आदमी पार्टी के साथ राजनीतिक तौर पर कैसे दिखाई दे रहा है। चुघ ने सवाल उठाया कि क्या पंजाब पुलिस ने ऐसे लोगों के आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए कोई NOC जारी की है? उन्होंने विशेष रूप से कमल कुमार उर्फ बोरी और गुरप्रीत सिंह को लेकर भी यही सवाल पूछा है। चुघ ने यह भी पूछा कि यदि किसी तरह की NOC जारी की गई है तो क्या वह राजनीतिक दबाव में जारी हुई।
बोरी और पुलिस अफसरों की पार्टी से शुरू हुआ विवाद
कमल कुमार उर्फ बोरी का नाम अगस्त 2023 में उस समय चर्चा में आया था, जब अमृतसर के एक होटल में आयोजित जन्मदिन की पार्टी के वीडियो सामने आए थे। वीडियो में कई पुलिस अधिकारी बोरी के साथ नजर आए थे। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी 7 अगस्त 2023 को आयोजित हुई थी और वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद दो डीएसपी समेत कई पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी।
26 अगस्त 2023 को बोरी को अवैध हिरासत, आपराधिक धमकी और आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय उसके खिलाफ 15 से अधिक मामले दर्ज होने की बात भी रिपोर्टों में कही गई थी।
बाद में बोरी की तस्वीरें अलग-अलग राजनीतिक नेताओं के साथ भी सामने आईं। 30 अगस्त 2023 की रिपोर्ट में उसकी तस्वीरें कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला और आप विधायक जसबीर सिंह के साथ सामने आने का उल्लेख किया गया था।
2026 में बोरी फिर चर्चा में आया। मार्च 2026 में एनसीबी ने बोरी और उसकी पत्नी को करीब 17 किलो मादक पदार्थों की बरामदगी से जुड़े मामले में समन किया। रिपोर्ट के अनुसार एनसीबी ने कहा था कि बोरी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कई मामले हैं और कुछ मामले अदालत में लंबित हैं।
गुरप्रीत सिंह सेखों की आप में एंट्री पर भी विवाद
तरुण चुघ के सवालों का दूसरा बड़ा संदर्भ गुरप्रीत सिंह सेखों का है। सेखों 2016 के चर्चित नाभा जेल ब्रेक मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल रहा है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक उसके खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में 49 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि विस्तृत डोजियर में हत्या, हत्या के प्रयास, फिरौती, लूट, अपहरण, साजिश, आर्म्स एक्ट एनडीपीएस एक्ट और UAPA सहित विभिन्न धाराओं से जुड़े मामले दर्ज होने का उल्लेख है।
6 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जीरा में आयोजित कार्यक्रम में गुरप्रीत सिंह सेखों को आम आदमी पार्टी में शामिल कराया। मुख्यमंत्री ने उसे सिरोपा देकर पार्टी में स्वागत किया। रिपोर्टों के अनुसार सेखों ने पार्टी में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री मान के प्रति समर्थन जताया।
सेखों का कहना है कि उसने अपना अतीत पीछे छोड़ दिया है और वह सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहा है। दूसरी ओर, उसके आप में शामिल होने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस और अकाली दल ने इस फैसले की आलोचना की है।
मोहनजीत प्रकरण ने भी बढ़ाई सरकार की मुश्किल
तरुण चुघ ने अपने वीडियो में मोहनजीत सिंह के साथ कथित पुलिस यातना का मामला भी उठाया। मामला 2 सितंबर 2026 का है, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान का शेरों गांव में ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम था। रिपोर्टों के अनुसार मोहनजीत ने कार्यक्रम के दौरान छत से काला झंडा दिखाया था। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। बाद में उसने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उसे बिजली के झटके दिए गए, पीटा गया और ब्लेड से जांघों पर चोटें पहुंचाकर उन पर नमक डाला गया। पुलिस ने इन आरोपों को जांच के अधीन बताया और कहा कि मोहनजीत के खिलाफ पहले से कई FIR दर्ज हैं तथा उसका डोप टेस्ट भी पॉजिटिव आया था।
मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया। आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव, DGP, SSP संगरूर और जिला मजिस्ट्रेट से रिपोर्ट मांगी तथा FIR और हिरासत से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा। चुघ की शिकायत के बाद आयोग ने कार्रवाई की और दो सप्ताह के भीतर Action Taken Report मांगी।
इसके बाद पंजाब सरकार ने सुनाम के DSP हरविंदर सिंह को स्थानांतरित किया, जबकि तीन अन्य पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइंस भेज दिया गया। यह कार्रवाई मोहनजीत की कथित हिरासत में यातना के आरोपों की जांच के बीच हुई।
तरुण चुघ ने इसी पूरे घटनाक्रम को जोड़ते हुए DGP से पूछा है कि यदि पंजाब में कानून सबके लिए समान है तो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की राजनीतिक गतिविधियों और पुलिस अधिकारियों के साथ उनके संबंधों को लेकर अलग-अलग मानदंड क्यों दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मोहनजीत के मामले में NHRC के सक्रिय होने के बाद ही पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों हुई।
हालांकि, NOC जारी होने का कोई स्वतंत्र पुष्ट दस्तावेज या आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला है। इसलिए चुघ का यह सवाल खबर में सवाल/आरोप के रूप में ही रखा जाना उचित है, स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।






