जालंधर में 60 दिनों में 3 कमिश्नर बदले, शहर की समस्याएं जस की तस: रविश राज

अधिकारी बदलते रहे, लेकिन सड़क, सफाई और कूड़ा प्रबंधन के सवाल कायम; कांग्रेस नेता ने सरकार से मांगा स्थिर प्रशासन

जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब न्यूज) : जालंधर नगर निगम में करीब 60 दिनों के भीतर तीन बार शीर्ष प्रशासनिक बदलाव होने को लेकर कांग्रेस नेता और पंजाब ब्राह्मण बोर्ड के पूर्व निदेशक रविश राज शर्मा ने सरकार और नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारी बदलने से शहर की बुनियादी समस्याएं खत्म नहीं हो रहीं। उनके मुताबिक नगर निगम को राजनीतिक और प्रशासनिक बदलावों से आगे बढ़कर सड़क, सफाई, जल निकासी और कूड़ा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।

नगर निगम में लगातार बदलाव की बात को हाल की रिपोर्ट भी रेखांकित करती है। पिछले 60 दिनों में नगर निगम के शीर्ष पद पर तीन बदलाव हुए। जुलाई में एन कुमार के बाद आईएएस अधिकारी संदीप ऋषि ने निगम का कार्यभार संभाला था और अब उनके अतिरिक्त कार्यभार संभालने के महज 27 दिन बाद PCS अधिकारी सुरिंदर सिंह को नगर निगम कमिश्नर नियुक्त किया गया है।

रविश राज का कहना है कि सवाल केवल कमिश्नर बदलने का नहीं, बल्कि शहर की समस्याओं के समाधान की निरंतरता का है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक अस्थिरता का असर फाइलों, परियोजनाओं और जमीनी कामकाज पर पड़ सकता है।

शहर में सड़क और जल निकासी की स्थिति का मुद्दा हाल में पठानकोट चौक क्षेत्र में भी सामने आया। अगस्त में जलभराव वाले हिस्से में एक व्यक्ति विजय महेंदरू की मौत की सूचना के बाद निगम और संबंधित अधिकारियों ने ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट और क्षतिग्रस्त स्लैब की मरम्मत के निर्देश दिए थे। हालांकि, द ट्रिब्यून की रिपोर्ट में मौत की परिस्थितियों को आधिकारिक रूप से पूरी तरह स्थापित नहीं बताया गया था। मृतक के बेटे राजू महेंदरू ने बताया था कि एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार उनके पिता का वाहन जलभराव वाले हिस्से में फंस गया था और वे गिर गए थे।

कूड़ा प्रबंधन भी निगम के सामने बड़ा सवाल बना हुआ है। वरियाणा डंप साइट को लेकर NGT ने अगस्त में ताजा निरीक्षण के निर्देश दिए। ट्रिब्यून के अनुसार PPCB की जांच में कचरा सेग्रीगेशन, लीचेट ट्रीटमेंट, लैंडफिल फायर और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी कमियां दर्ज हुईं। निगम पर लगाए गए 9.30 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय मुआवजे में से 90 लाख रुपये जमा होने और 8.40 करोड़ रुपये बकाया रहने की बात भी NGT के रिकॉर्ड में दर्ज है।

रविश राज ने कहा कि जालंधर को ऐसे प्रशासन की जरूरत है जो अधिकारी बदलने के बजाय काम की जवाबदेही तय करे। उनका कहना है कि शहर की राजनीति में भी अब पुराने तौर-तरीकों के बजाय युवा सोच, जवाबदेही और रोजमर्रा की नागरिक समस्याओं पर केंद्रित नजरिया जरूरी है। उन्होंने सरकार और नगर निगम से पूछा कि आखिर जालंधर को स्थिर प्रशासन कब मिलेगा और सड़क, सफाई तथा कूड़ा प्रबंधन जैसी मूलभूत समस्याओं का समयबद्ध समाधान कब होगा।

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