70 लाख की कथित ठगी के आरोप में पिरामिड इमिग्रेशन ऑफिस में हंगामा, स्टाफ से हाथापाई

विदेश भेजने के नाम पर रकम लेने का आरोप; पैसे वापस मांगने पहुंचे पीड़ित पक्ष और समर्थकों ने ऑफिस में किया विरोध, स्थिति बिगड़ने पर स्टाफ से भी मारपीट


जालंधर (जागरूक पंजाब) :
जालंधर बस स्टैंड के सामने स्थित पिरामिड इमिग्रेशन/ट्रैवल कंपनी के ऑफिस में मंगलवार को उस समय जमकर हंगामा हो गया, जब विदेश भेजने के नाम पर कथित तौर पर करीब 70 लाख रुपये दिए जाने का दावा करने वाले पीड़ित पक्ष और उनके समर्थक ऑफिस पहुंच गए। पीड़ित पक्ष ने ट्रैवल एजेंट पर रकम लेने के बावजूद विदेश न भेजने और पैसे वापस न करने के आरोप लगाए।

पीड़ित पक्ष के अनुसार, उन्होंने विदेश भेजने के लिए एजेंट को करीब 70 लाख रुपये दिए थे। उनका आरोप है कि काफी समय बीतने के बावजूद न तो उन्हें विदेश भेजा गया और न ही उनकी रकम वापस की गई। पीड़ितों का कहना है कि वे पहले भी कई बार अपनी रकम वापस लेने के लिए ऑफिस के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन कथित तौर पर उन्हें पैसे वापस नहीं मिले।

मंगलवार को इसी मामले को लेकर पीड़ित पक्ष अपने समर्थकों के साथ पिरामिड के ऑफिस पहुंचा। वहां रकम वापस करने को लेकर विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते स्थिति हंगामे में बदल गई। आरोप है कि कुछ लोगों ने ऑफिस के अंदर घुसकर स्टाफ के साथ हाथापाई की। घटना के दौरान ऑफिस में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अब जांच में यह स्पष्ट होना है कि पीड़ित पक्ष की ओर से कितनी रकम और किस माध्यम से दी गई थी, विदेश भेजने के लिए क्या समझौता हुआ था, रकम वापस करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले क्या बातचीत हुई और ऑफिस में हुई मारपीट में कौन-कौन लोग शामिल थे।

फिलहाल मामले में दोनों पक्षों का पक्ष और पुलिस कार्रवाई सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। खास तौर पर 70 लाख रुपये की रकम से जुड़े दावे की पुष्टि दस्तावेजों, भुगतान के रिकॉर्ड और शिकायत में दर्ज तथ्यों से होना जरूरी है।


करीब 10 साल पहले Royal Education Consultants पर लगे थे बड़े ठगी के आरोप

पिरामिड इमिग्रेशन के मौजूदा विवाद से अलग, जालंधर में करीब एक दशक पहले Royal Education Consultants से जुड़ा बड़ा इमिग्रेशन विवाद सामने आया था। उस मामले में कंपनी के मालिक गगनदीप सिंह मान के खिलाफ विदेश भेजने के नाम पर लोगों से रकम लेने और कथित धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर पुलिस केस दर्ज हुए थे।

दिसंबर 2015 में पुलिस ने बैंक लॉकर की तलाशी लेकर करीब 400 पासपोर्ट बरामद किए थे। बाद की रिपोर्टों में इस मामले में बड़ी संख्या में लोगों की शिकायतों का भी उल्लेख हुआ था। यह मामला उस समय जालंधर के बड़े इमिग्रेशन विवादों में शामिल रहा था।

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