सड़क पर गाली-गलौज और पुलिस की निष्क्रियता पर हो सकती है कार्रवाई?
जालंधर (जागरूक पंजाब न्यूज नेटवर्क) : कपूरथला चौक में आटो और कार चालक के बीच हुई हाथापाई का वीरवार वीडियो तेजी से वायरल हो गया। आटो चालक को पीटने वालों ने इस बात का भी ध्यान नहीं रखा कि आसपास पब्लिक और महिलाएं भी हैं। इस दौरान दो पुलिस कर्मचारी भी मौके पर थे, लेकिन वे तमाशा देखते रहे और खानापूर्ति की कार्रवाई करते दिखे। आखिर कुछ लोग भी इस झगड़े में आटो चालक पर टूट पड़े। लगातार गालियां निकालते रहे। जिस तरह हमला किया गया और पुलिस खानापूर्ति करती रही, उसे देखते हुए ही शायद आटो चालक ने माफी मांगकर जान छुड़ा ली। मौके पर खड़े लोग भी पुलिस की इस बेपरवाही पर कहते रहे- किसे दा मुंडा मार देणा सी ते पुलिस खलौती वेखदी रही।
सार्वजनिक जगह पर गाली-गलौज महज ‘आपसी झगड़ा’ नहीं, परिस्थितियों के अनुसार कानूनी मामला भी बन सकता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 सार्वजनिक स्थान पर दूसरों को परेशान करने वाले अश्लील कृत्य या अश्लील शब्दों से संबंधित है। इसके अलावा, यदि गाली-गलौज इस स्तर तक पहुंचती है कि जानबूझकर किसी व्यक्ति का अपमान कर उसे शांति भंग करने के लिए उकसाया गया हो, तो BNS की धारा 352 के तहत कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। हालांकि किसी मामले में कौन-सी धारा लगेगी, यह पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
मारपीट होने पर धाराएं और गंभीर हो सकती हैं- कार सवार, ऑटो चालक या मौके पर पहुंचे अन्य लोगों द्वारा किसी को थप्पड़, मुक्का मारना, धक्का देना या चोट पहुंचाना सामने आता है तो पुलिस मेडिकल रिपोर्ट, वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर मारपीट से संबंधित प्रावधान भी लगा सकती है। यदि कई लोग मिलकर किसी व्यक्ति से मारपीट करते हैं तो प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अलग-अलग जांची जा सकती है।
पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है- यदि वीडियो में पुलिस मुलाजिम मौके पर मौजूद दिखाई देते हैं और उनके सामने विवाद बढ़ता रहा, लेकिन उन्होंने स्थिति नियंत्रित करने या झगड़ा छुड़ाने के लिए उचित कदम नहीं उठाया, तो वरिष्ठ अधिकारी घटना की विभागीय जांच कर सकते हैं। कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिसकर्मी वहां किस ड्यूटी पर थे, उन्हें घटना की जानकारी थी या नहीं और स्थिति नियंत्रित करने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए। केवल वीडियो में पुलिसकर्मी का खड़ा दिखाई देना अपने आप में लापरवाही साबित नहीं करता।
शिकायत का रास्ता भी खुला है। प्रभावित व्यक्ति या प्रत्यक्षदर्शी वीडियो सहित संबंधित पुलिस अधिकारी के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायत दे सकता है। पंजाब पुलिस की आधिकारिक शिकायत व्यवस्था में पुलिस की ओर से ‘No Action’ और ‘Biased Action’ जैसी शिकायतों के लिए व्यवस्था उपलब्ध है।
नोट- वीडियो में लगातार गाली-गलौज होने के कारण सामाजिक दायित्व निभाते हुए उसकी मूल आवाज बंद की गई है।






