कर्मचारियों पर सख्ती से घिरी मान सरकार, विपक्ष ने पूछा- हक मांगने वालों को नोटिस क्यों?

सरकार के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा बना सियासी मुद्दा; गैरहाजिरी की सूचियों के आदेश पर विपक्ष हमलावर

बुरे फंसे मान

जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की महाहड़ताल के बीच सरकार की ओर से गैरहाजिर कर्मचारियों की सूचियां तलब करने का आदेश अब सियासी मुद्दा बन गया है। कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर मैदान में हैं तो विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी सरकार पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने सवाल उठाया है कि कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान करने के बजाय सरकार उन्हें कार्रवाई की चेतावनी क्यों दे रही है।

पंजाब सरकार के कार्मिक विभाग ने 27 अगस्त को सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर ड्यूटी से अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची मांगी है। आदेश में कहा गया है कि ऐसी सूचियां उसी दिन कार्यदिवस समाप्त होने तक सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी जाएं और लागू सेवा नियमों के तहत आगे आवश्यक कार्रवाई की जाए। सरकार का तर्क है कि कर्मचारियों के कार्यालयों में मौजूद नहीं होने के कारण आम जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है।

सरकार की इसी सख्ती को विपक्ष ने मुद्दा बना लिया है। विपक्ष का कहना है कि कर्मचारियों की शिकायतों और लंबित वित्तीय मांगों पर गंभीरता से बातचीत करने के बजाय गैरहाजिरी की सूची तैयार करवाना सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ाने वाला कदम है। कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों के समर्थन में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबित डीए, ओपीएस और अन्य मांगों को लेकर कर्मचारी लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

विपक्ष का वार- सरकार के पास कर्मचारियों को देने के लिए जवाब नहीं

कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने सरकार पर कर्मचारियों के प्रति संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनका लंबित डीए देने में टालमटोल की जा रही है और ओपीएस का वादा भी पूरा नहीं हुआ। उनके मुताबिक जायज मांगों के लिए कर्मचारियों को अदालतों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष कर्मचारियों और पेंशनरों की हक की लड़ाई में उनके साथ खड़ा है।

अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने भी कर्मचारियों के पक्ष में सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी पूरी ईमानदारी से जनता की सेवा करते हैं और उन्हें लंबे समय से लंबित बकाये का भुगतान किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसते हुए आरोप लगाया कि कर्मचारियों को डीए देने के बजाय सरकारी पैसा डॉक्यूमेंट्री और पीआर गतिविधियों पर खर्च किया जा रहा है।

हड़ताल से ज्यादा अब सरकार की कार्रवाई बनी चर्चा

महाहड़ताल का असर सरकारी कार्यालयों और कुछ सरकारी सेवाओं पर दिखाई दिया, लेकिन इसके साथ ही सरकार की ओर से जारी कार्रवाई संबंधी पत्र ने पूरे मामले को नया राजनीतिक रंग दे दिया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे सरकार के इस दबाव से पीछे नहीं हटेंगे। सीपीएफ कर्मचारी यूनियन के सूबा प्रधान सुखजीत सिंह ने कहा है कि 29 अगस्त की सूबे की बैठक में मुख्यमंत्री को इसका जवाब दिया जाएगा।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार जितनी मर्जी सूचियां तैयार करवा ले, वे ऐसे पत्रों की परवाह नहीं करते। संगठन इसे कर्मचारियों को दबाव में लेने की कोशिश मान रहे हैं। उनका कहना है कि हड़ताल और महाबंद के कार्यक्रम पहले से तय थे और अब सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए।

परगट सिंह, विधायक जालंधर कैंट

“कर्मचारियों की हक की लड़ाई में विपक्ष उनके साथ”

परगट सिंह ने कहा कि पंजाब के कर्मचारी हमेशा मेहनत और ईमानदारी से जनता की सेवा करते हैं। ऐसे कर्मचारियों को उनका लंबित डीए मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि डीए देने में टालमटोल, ओपीएस का अधूरा वादा और जायज मांगों के लिए अदालतों के चक्कर सरकार के रवैये पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों की हक की लड़ाई में उनके साथ खड़ा है।

हरसिमरत कौर बादल

“कर्मचारियों के बकाये का भुगतान करे सरकार”

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि वह पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी जनता की सेवा करते हैं और उन्हें उनके लंबे समय से लंबित बकाये का भुगतान मिलना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कर्मचारियों को डीए देने के बजाय सरकार का पैसा डॉक्यूमेंट्री और पीआर गतिविधियों पर खर्च किया जा रहा है।

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