पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से संशोधन विधेयक पास
जालंधर / चंडीगढ़ (जागरूक पंजाब) : जालंधर सहित पूरे पंजाब के निजी स्कूलों की तरफ से हर साल की जाने वाली अंधाधुंध फीस वृद्धि, री-एडमिशन शुल्क और तय दुकानों से किताबें-वर्दी खरीदने के दबाव पर अब कानूनी नकेल कस गई है। पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से संशोधन विधेयक पास कर निजी स्कूलों द्वारा सालाना फीस बढ़ोतरी की अधिकतम सीमा 5 प्रतिशत तय कर दी है।
जालंधर के पॉश इलाकों (जैसे मॉडल टाउन, कैंट और अर्बन एस्टेट) में स्थित नामी निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावक लगातार सड़कों पर उतरकर विरोध जताते रहे हैं। अभिभावकों की सबसे बड़ी शिकायत यह रही है कि ‘डेवलपमेंट चार्ज’, ‘एनुअल फीस’ और ‘स्मार्ट क्लास’ के नाम पर हर साल 10 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी जाती थी। नए कानून लागू होने के बाद अब जालंधर का कोई भी निजी स्कूल बिना जिला नियामक संस्था की 180 दिन पूर्व अनुमति और ठोस कारणों के बिना 5% से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा।
कानून के मुख्य कड़े प्रावधान:
- 3 साल की फीस का हिसाब और रिफंड: यदि किसी स्कूल ने पिछले 36 महीनों में कुल 15% से अधिक फीस बढ़ाई है, तो अतिरिक्त वसूली गई राशि 90 दिनों के भीतर अभिभावकों को लौटानी होगी।
- किताबों और वर्दी का एकाधिकार खत्म: स्कूल किसी विशेष विक्रेता या दुकान से ड्रेस या किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। किताबों के लिए कम से कम तीन प्रकाशकों या विक्रेताओं की सूची जारी करनी होगी।
- पारदर्शिता और भारी जुर्माना: फीस बढ़ाने से 90 दिन पहले संशोधित स्ट्रक्चर स्कूल की वेबसाइट व नोटिस बोर्ड पर लगाना अनिवार्य होगा। आदेश न मानने पर प्रति दिन ₹10,000 अतिरिक्त जुर्माना और तीसरी बार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने का प्रावधान है।
पेरेंट्स एसोसिएशन ने इस कदम का स्वागत करते हुए प्रशासन से मांग की है कि कागजों पर बने इस नियम का जमीनी स्तर पर सख्त अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इस फैसले से राज्य के 7,800 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 32 लाख छात्रों और उनके परिवारों को सीधी राहत मिलेगी




