100 करोड़ के ट्रस्ट घोटाले की फाइल फिर चर्चा में, सीबीआई जांच का दायरा जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट तक पहुंचेगा, ईडी की जालंधर विजिलेंस में एंट्री की तैयारी

अधिकारी रहे चुके पिता के साथ-साथ नेता पुत्र की भूमिका की भी हो सकती है जांच

मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब
जालंधर : जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में सामने आए करीब 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की फाइलें एक बार फिर चर्चा में हैं। करीब ढाई साल पहले तत्कालीन ट्रस्ट चेयरमैन जगतार सिंह संघेड़ा ने दावा किया था कि पिछली चेयरमैनियों और अधिकारियों के कार्यकाल में ट्रस्ट की बेशकीमती संपत्तियों की कथित गलत अलॉटमेंट, कम कीमत पर संपत्तियां देने और सरकारी संपत्तियों से जुड़े अनियमित लेनदेन के कारण करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संघेड़ा ने बैंक से बैंक हुए कथित लेनदेन में 50 हजार रुपये तक की रिश्वत के प्रमाण मिलने का भी दावा किया था। जांच में 2016 से 2022 के बीच हुई कई अलॉटमेंट और रजिस्ट्रियों को भी खंगाला गया। सितंबर 2024 में छह बेशकीमती संपत्तियों की कथित संदिग्ध अलॉटमेंट का मामला सामने आया। इनमें 500-500 वर्ग गज के तीन प्लॉटों की कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये प्रति प्लॉट बताई गई, जबकि उन्हें कथित तौर पर 7 लाख से 22 लाख रुपये के बीच अलॉट किए जाने का आरोप लगा। खास बात यह है कि इस घोटाला प्रकरण में ट्रस्ट के अधिकार रह चुके व्यक्ति के साथ-साथ उनके नेता बन चुके पुत्र की भूमिका की भी जांच हो सकती है। क्योंकि वही पुत्र अक्सर ट्रस्ट में डीलिंग भी करता रहा।

इसके बाद पूर्व कार्यकारी अधिकारी और ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ गलत रजिस्ट्रियों के मामले में एफआईआर दर्ज हुई। गुरु अमरदास नगर के प्लॉट नंबर 460 और न्यू जवाहर नगर के मकान नंबर 462 से जुड़े मामलों में करीब 7-8 साल पुरानी रजिस्ट्रियों की जांच की गई। सितंबर 2024 में ही ट्रस्ट चेयरमैन ने सात और संदिग्ध सौदों का दावा किया था, जिनमें कथित तौर पर करोड़ों रुपये की रिश्वत के बदले कीमती प्लॉट बेहद कम कीमत पर दिए जाने की बात कही गई। इन मामलों में कुछ मूल फाइलें गायब होने की बात भी सामने आई थी और राजस्व विभाग से दस्तावेज लेकर फाइलें दोबारा तैयार करने की प्रक्रिया की गई। ट्रस्ट से जुड़े जमीन अधिग्रहण के एक अलग मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी इकबाल सिंह संधू को गिरफ्तार किया था। यह मामला सूर्या एन्क्लेव एक्सटेंशन के लिए 94.97 एकड़ जमीन अधिग्रहण में करीब 5 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा था। यानी ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप अलग-अलग संपत्तियों, रजिस्ट्रियों और जमीन अधिग्रहण तक पहुंचे।

अब 2026 में राजबीर सिंह घुम्मन और उनके कथित सहयोगियों से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की कार्रवाई के बाद पुराने ट्रस्ट मामलों को लेकर भी नए सवाल उठने लगे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई द्वारा मौजूदा भ्रष्टाचार मामले की जांच शुरू किए जाने और अक्टूबर 2026 में कई ठिकानों पर छापेमारी के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि जांच का दायरा आगे कितना बढ़ता है। क्या सीबीआई की जांच केवल मौजूदा आरोपों और 2023 से 2026 के बीच की कथित गतिविधियों तक सीमित रहेगी या सरकारी जमीन, संपत्तियों की अलॉटमेंट, लाइसेंस, नीतिगत फैसलों और पहले सामने आ चुके भ्रष्टाचार के मामलों की कड़ियां भी जांच के दायरे में आएंगी?

इसी संदर्भ में जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की पुरानी फाइलें महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में सीबीआई ने 100 करोड़ रुपये वाले पुराने ट्रस्ट मामले को अपने मौजूदा मामले में औपचारिक रूप से शामिल किए जाने की कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। इसलिए दोनों मामलों को सीधे तौर पर एक ही घोटाला कहना अभी उचित नहीं होगा। लेकिन यदि मौजूदा जांच के दौरान पुराने मामलों से जुड़े अधिकारियों, संपत्तियों, दस्तावेजों या वित्तीय लेनदेन की कोई कड़ी सामने आती है तो जांच एजेंसियों के लिए ट्रस्ट की पुरानी फाइलों की दोबारा पड़ताल का रास्ता खुल सकता है। इसी तरह कथित पैसों के लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े वित्तीय लाभ की कोई कड़ी सामने आने पर प्रवर्तन निदेशालय की भूमिका का सवाल भी उठ सकता है। अब नजर इस बात पर है कि मौजूदा सीबीआई जांच आगे बढ़ने पर जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की उन पुरानी फाइलों तक पहुंचती है या नहीं, जिनमें करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं के आरोप पहले ही सामने आ चुके हैं।

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