107 संदिग्ध मामलों की निगरानी, 3 मरीज अस्पतालों में भर्ती; 2 को DMC लुधियाना किया गया रेफर
जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : जालंधर जिले में H1N1 को लेकर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी है। 12 सितंबर 2026 को जारी H1N1 रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में आज कोई नया पॉजिटिव केस रिपोर्ट नहीं हुआ, लेकिन अब तक कुल 17 मामले पॉजिटिव पाए जा चुके हैं। वहीं H1N1 के लिए अब तक 107 संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल जिले में 3 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 1 मरीज सिविल अस्पताल जालंधर में जबकि 2 मरीज DMC लुधियाना में भर्ती हैं। यानी अब तक उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 2 मरीजों को लुधियाना रेफर किया गया है।
क्या है H1N1?
H1N1, Influenza A वायरस का एक सबटाइप है, जिसे आम तौर पर स्वाइन फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। 2009 में H1N1 के कारण वैश्विक महामारी सामने आई थी, लेकिन WHO के मुताबिक A(H1N1)pdm09 वायरस अब मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस के रूप में मानव आबादी में प्रसारित होता है।
इसमें अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी तथा नाक बहने जैसे लक्षण हो सकते हैं। अधिकांश लोग करीब एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
कैसे फैलता है?
H1N1 मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली सांस की बूंदों के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर इसका प्रसार तेजी से हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति के दूषित हाथों के संपर्क से भी वायरस फैलने का खतरा रहता है।
बचाव के लिए क्या करें?
- खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक को टिश्यू/रुमाल से ढकें।
- हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं।
- बुखार, खांसी या फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों के नजदीकी संपर्क से बचें।
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष सावधानी बरतें।
- लक्षण गंभीर होने या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
- उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार मौसमी फ्लू वैक्सीन पर विचार किया जा सकता है। WHO के अनुसार इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।
जनता के लिए जरूरी बात: H1N1 के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षण देखकर स्वयं बीमारी की पुष्टि न करें। बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने पर चिकित्सकीय जांच करवाना जरूरी है।






