जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा रविंदर बांसल को मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना कमीशन का डायरेक्टर नियुक्त किए जाने के बाद जालंधर सेंट्रल हलके की सियासत में हलचल तेज हो गई है। बांसल को जिला प्लानिंग बोर्ड की ओर से विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया है। अब तक राज्य स्तर पर करीब 4 लाख लोग इस योजना का लाभ उठा चुके हैं, जबकि जालंधर से ही दूसरे राज्यों के प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए लगभग 1500 बसें रवाना की जा चुकी हैं। सरकार का आगामी लक्ष्य पंजाब के 12 लाख लोगों को मुफ़्त तीर्थ यात्रा करवाना है।
फिलहाल आनंदपुर साहिब, कीरतपुर साहिब, नैना देवी, दुर्ग्याणा मंदिर, श्रीराम तीर्थ, खाटू श्याम, सालासर, वृंदावन, मथुरा और हरिद्वार-ऋषिकेश जैसे पावन स्थलों के लिए बसें जा रही हैं। कमीशन की कार्यप्रणाली को और दुरुस्त कर इसमें नए तीर्थ स्थलों को जोड़ने की तैयारी है। बांसल का कहना है कि पहले उनके पास केवल जिले की जिम्मेदारी थी, लेकिन अब पूरे पंजाब की सेवा का अवसर मिला है।
सेंट्रल हलके में धार्मिक जुड़ाव ही जीत की चाबी
जालंधर सेंट्रल हलके का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि यहां की जनता हमेशा उन्हीं नेताओं को प्राथमिकता देती है जो धार्मिक और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
रमन अरोड़ा: विधायक रमन अरोड़ा की पहचान श्री बाला जी मंदिर से लगातार जुड़े रहने के कारण बनी।
रजिंदर बेरी: पूर्व विधायक रजिंदर बेरी हर छोटे-बड़े धार्मिक व सामाजिक आयोजनों में अपनी मजबूत उपस्थिति के लिए जाने जाते हैं।
कोहली और अरोड़ा के लिए चुनौती बन सकते हैं बांसल-
वर्तमान में पार्टी ने नितिन कोहली को हलका इंचार्ज बना रखा है, लेकिन दूसरी ओर राज्य सरकार जिस तरह से रविंदर बांसल का कद लगातार बढ़ा रही है, उससे हलके के भावी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। राज्यभर के श्रद्धालुओं को तीर्थ यात्रा कराने की बड़ी जिम्मेदारी मिलने से बांसल का पलड़ा काफी भारी नजर आ रहा है।
धार्मिक कार्यों के जरिए सीधे जनता के दिलों में जगह बना रहे बांसल की यह बढ़ती सक्रियता आने वाले समय में रमन अरोड़ा और नितिन कोहली, दोनों की राजनीतिक जमीन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।






