जालंधर (मनदीप शर्मा, जागरूक पंजाब) : शास्त्री चौक स्थित श्रीराम शरणम आश्रम में रविवार सुबह 8 से 9 बजे तक भक्तिरस की धारा बही। कार्यक्रम की शुरुआत श्री अमृतवाणी के पाठ से हुई। इसके बाद भक्त अश्वनी प्रभाकर जी ने मधुर स्वर में ‘आज जन्मदिन सद्गुरु का, मंगल गाइए’ तथा ‘जय गुरुदेव, जय जय गुरुदेव’ की धुन से भक्तों को भावविभोर किया।
राजा और साधक की कथा : पवित्र ग्रंथ भक्ति प्रकाश के माध्यम से बाल कृष्ण जी ने एक संदर्भ का व्याख्यान करते हुए राजा और साधक की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि एक राजा जंगल से गुजर रहा था। वहां एक व्यक्ति प्रभु सुमिरन में लीन था। राजा ने उसे घोड़ा पकड़ने के लिए कहा, लेकिन वह प्रभु चरणों में जुड़ा रहा। राजा ने उसे मारा और कोड़े लगाए, फिर भी वह अपनी साधना से नहीं हटा। बाद में राजा घोड़े के बिदकने से गड्ढे में गिर गया। साधक ने उसे बाहर निकाला और सेवा की। राजा के पूछने पर साधक ने कहा कि उस समय वह ईश्वर की भक्ति में था, जबकि अब राजा निःसहाय है और निःसहाय की सेवा करना हमारा धर्म है।
बाल कृष्ण जी ने कहा कि परमेश्वर को याद करने के दो तरीके जाप-माला और ध्यान हैं। उन्होंने शांत-एकांत स्थान में कुछ समय ईश्वर चरणों से जुड़ने का संदेश दिया।
सुबह 7 से 8 बजे तक होगा जाप
ब्रह्मलीन पूज्य मांजी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आश्रम में सुबह 7 से 8 बजे तक जाप होगा। 23 अक्टूबर को पानीपत में सत्संग निश्चित हुआ है। साधक अगले रविवार को अपना नाम लिखवा सकते हैं। अंत में ‘नमो नमः गुरुदेव, तुझको नमो नमः’ की धुन के साथ सत्संग का समापन हुआ।






