फिल्लौर (जागरूक पंजाब) : पंजाब सरकार ने मानवाधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राज्य का कोई भी अस्पताल (सरकारी या निजी) इलाज का बकाया बिल न चुकाने की स्थिति में किसी मृतक का शव (Dead Body) बंधक बनाकर नहीं रख सकेगा। पंजाब ऐसा आदेश जारी करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह खुलासा पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ (यूटी) मानवाधिकार आयोग के सदस्य और पद्मश्री अवॉर्डी जितेन्द्र सिंह शंटी ने शनिवार को फिल्लौर में आयोजित एक ओपन हियरिंग (जनसुनवाई) कैंप के दौरान किया।
डीआरवी डीएवी स्कूल में लगी जनसुनवाई, मौके पर निपटाईं शिकायतें
फिल्लौर के डीआरवी डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में आयोजित इस विशेष कैंप में जितेन्द्र सिंह शंटी ने आम लोगों की शिकायतें सुनीं। उनके साथ एसडीएम फिल्लौर दीपक भाटिया और डीएसपी भारत भूषण भी मौजूद रहे। मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने मौके पर ही अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित निपटारे के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयोग पंजाब भर में ऐसे कैंप लगा रहा है ताकि जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक कर सीधे न्याय पहुंचाया जा सके।
आदेश का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
पद्मश्री जितेन्द्र सिंह शंटी ने बताया कि मानवाधिकार आयोग के सुझावों पर अमल करते हुए पंजाब सरकार ने यह नोटिफिकेशन जारी किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि:
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अगर कोई भी अस्पताल बकाया पैसों के लिए शव को रोकता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग को नियमित रूप से अस्पतालों की चेकिंग करने और इस आदेश को सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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मृतकों की गरिमा बनाए रखने के लिए अस्पतालों में पर्याप्त मोर्चरी (शवगृह) सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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आयोग ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मुफ्त अंतिम संस्कार की सुविधा प्रदान करने की एडवाइजरी भी जारी की है।
‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम: फिल्लौर में 900 से अधिक नशा तस्कर गिरफ्तार
कैंप के दौरान डीएसपी भारत भूषण ने सब-डिवीजन की रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि पंजाब सरकार की ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम के तहत फिल्लौर में 687 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस ने 900 से अधिक नशा तस्करों को गिरफ्तार कर बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए हैं, जबकि लगभग 100 प्रभावित व्यक्तियों को नशामुक्ति केंद्रों के जरिए समाज की मुख्यधारा में वापस लाया गया है।
हेल्पलाइन नंबर 9855475547 जारी, 2 दिन में होगा एक्शन
आयोग के सदस्य ने बताया कि मानवाधिकारों के उल्लंघन की रिपोर्ट करने के लिए एक डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबर 9855475547 और ऑनलाइन पोर्टल www.pshrc.net शुरू किया गया है। सही शिकायतों पर महज 2 दिन के भीतर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जागरूकता बढ़ने के कारण अब आयोग के पास रोजाना 500 से अधिक शिकायतें आ रही हैं, जो पहले सिर्फ 40-50 होती थीं। इस अवसर पर ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम के समन्वयक पंकज भारद्वाज, अजय भील, मोहिंदर कौर कटारिया, जागृति सिंह और एसएमओ डॉ. सुनीता अग्रवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
नॉलेज बॉक्स : शवों को रोकने पर सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार कानून क्या कहता है?
अनुच्छेद 21 (Article 21): भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को ‘जीने का अधिकार’ देता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई ऐतिहासिक फैसलों (जैसे आश्रय मुदगल केस) में स्पष्ट किया है कि मरने के बाद भी इंसान की गरिमा (Dignity of the Dead) बरकरार रहती है और गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार उसका मौलिक अधिकार है।
अदालती रुख: दिल्ली हाई कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट पहले भी कह चुके हैं कि अस्पताल किसी मरीज के शव को ‘कब्जे की संपत्ति’ या ‘बकाया वसूली का जरिया’ नहीं बना सकते। बिल रिकवरी के लिए दीवानी अदालत (Civil Court) के जरिए कानूनी रास्ते अपनाए जाने चाहिए, न कि शव को बंधक बनाया जाए। पंजाब ने अब इसे बाकायदा नोटिफाई कर कानूनन लागू कर दिया है।

